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छत्तीसगढ़

तारलागुड़ा में रेत भंडारण और उत्खनन पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की माँग

बीजापुर। भोपालपटनम तहसील के तारलागुड़ा इलाके में रेत उत्खनन और भंडारण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नदी किनारे बड़े पैमाने पर रेत डंप किए जाने की जानकारी के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में भारी मात्रा में रेत निकालकर अलग-अलग स्थानों पर भंडारण किया जा रहा है, जिससे खनन प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

भंडारण स्थल पर सूचना पटल नहीं, वैधता पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर रेत का भंडारण किया गया है, वहां कई जगहों पर आवश्यक सूचना पटल तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि भंडारण की प्रक्रिया नियमानुसार संचालित हो रही है या नहीं। उनका कहना है कि यदि सभी गतिविधियां वैधानिक अनुमति के तहत संचालित हैं तो संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए।

भारी मशीनों से उत्खनन

ग्रामीणों का आरोप है कि रेत उत्खनन में पोकलेन, चेन माउंट और अन्य भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान इस पहलू की भी पड़ताल की जानी चाहिए। उनका मानना है कि अनियंत्रित उत्खनन से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।

पंचायत के नाम पट्टा, संचालन को लेकर उठ रहे सवाल

मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि रेत खदान का पट्टा ग्राम पंचायत के नाम पर होने की जानकारी सामने आ रही है, जबकि भंडारण और संचालन से जुड़े कार्यों में अन्य लोगों की भूमिका की चर्चा हो रही है। इसे लेकर ग्रामीण पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और खनन, परिवहन तथा भंडारण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग कर रहे हैं।

सेवानिवृत्त कर्मचारी की भूमिका पर भी चर्चाएं

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एक शासकीय कर्मचारी की भूमिका इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दायरे में सभी संभावित पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति समाप्त हो सके।

राजस्व हानि और पर्यावरणीय प्रभाव की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अवैध रूप से रेत निकासी और भंडारण किया जा रहा है तो इससे शासन को राजस्व का नुकसान हो सकता है। वहीं लगातार उत्खनन से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलस्तर और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जांच के बाद ही सामने आएगी हकीकत

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, डंप की गई रेत का मापन किया जाए, उत्खनन में मशीनों के उपयोग की जांच हो तथा खनन और भंडारण से जुड़े सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन और खनिज विभाग की संभावित कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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Kailash Jaiswal

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