बंगाल में आज फैसला: 293 सीटों के नतीजों पर टिकी निगाहें

कोलकाता: “बांग्ला एइबार कार?”—पिछले कई महीनों से गूंज रहे इस सवाल का जवाब आज मिलने वाला है। पश्चिम बंगाल की 294 में से 293 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना सोमवार सुबह आठ बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई है। एक सीट (फलता) पर गड़बड़ी की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने वहां 21 मई को पुनर्मतदान और 24 मई को मतगणना कराने का निर्णय लिया है।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजरें कोलकाता की भवानीपुर सीट पर हैं, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में दोनों नंदीग्राम सीट से आमने-सामने थे, जहां सुवेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की थी। इस बार सुवेंदु नंदीग्राम के साथ भवानीपुर से भी चुनाव मैदान में हैं।
राज्य के 77 मतगणना केंद्रों पर अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती जारी है। दोपहर तक रुझानों से साफ हो जाएगा कि तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएगी या भाजपा पहली बार सरकार बनाने में सफल होगी। वहीं, कांग्रेस और वाममोर्चा के प्रदर्शन पर भी सभी की नजरें टिकी हैं।
इस चुनाव में 2,917 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है, जिनमें ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी, अधीर रंजन चौधरी, मीनाक्षी मुखर्जी, दीप्शिता धर और अन्य प्रमुख चेहरे शामिल हैं। दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए मतदान में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे अधिक प्रतिशत है।
मतदाता सूची में करीब 90 लाख नाम कम होने के बावजूद मतदान में 30 लाख से अधिक मतदाताओं की बढ़ोतरी देखी गई। खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक भी मतदान के लिए अपने राज्य लौटे। विश्लेषकों के अनुसार, इस बार महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
मतगणना केंद्रों को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। केंद्रीय बलों की 700 कंपनियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है—अंदर केंद्रीय बल और बाहर पुलिस की निगरानी है। सभी कर्मियों के लिए क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र अनिवार्य किए गए हैं और मोबाइल फोन अंदर ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित करने के लिए 432 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब कुछ ही घंटों में यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की जनता ने किसे सत्ता की बागडोर सौंपने का फैसला किया है।



