PM मोदी बोले- कितनी भी बड़ी सत्ता मिल जाए, हमारा मूल मार्ग सेवा का ही रहेगा

देवास। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ‘सेवा संकल्प यात्रा’ में शामिल युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गुजरात से लेकर दिल्ली तक सेवा भारतीय जनता पार्टी की शासन व्यवस्था और संस्कारों का मूल भाव रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति और शासन व्यवस्था अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करना सभी का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।
वडनगर से वाराणसी तक निकाली जा रही ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागी फिलहाल मध्य प्रदेश के देवास जिले में हैं। यात्रा में विभिन्न राज्यों के युवा शामिल हैं और इसके दौरान सेवा, जनसंवाद तथा राष्ट्रीय एकता से जुड़े संदेश लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
‘कितनी भी बड़ी सत्ता मिले, मूल मार्ग सेवा का ही रहेगा’
प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के दौरान कहा कि जब शासन के मूल में सेवा का भाव होता है तो नीतियों के केंद्र में नागरिकों का कल्याण रहता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सत्ता या जिम्मेदारी क्यों न मिले, सेवा का मार्ग नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से कहा कि उनके आचरण और काम से लोगों तक सेवा का संदेश पहुंचना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सेवा केवल कहने का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार और कार्यों के जरिए दिखाई देने वाली भावना होनी चाहिए।
‘जन सेवा से देश सेवा’ को बताया जीवन का मूलमंत्र
पीएम मोदी ने कहा कि सेवा भाव से किए गए कार्यों को समाज लंबे समय तक याद रखता है। उन्होंने ‘जन सेवा से देश सेवा’ को अपने जीवन का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं की बुनियाद में भी सेवा का भाव रखा गया है।
उन्होंने कहा कि गरीबों, महिलाओं, लड़कियों, मरीजों और आदिवासियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लिए संचालित योजनाओं का उद्देश्य लोगों तक सहायता और सुविधाएं पहुंचाना है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवा पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने युवाओं से इस लक्ष्य के साथ मजबूती से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राजनीति, चुनाव और शासन व्यवस्था अपनी जगह हैं, लेकिन देश को आगे बढ़ाने के लिए सेवा भाव एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति हो सकता है।
यात्रा और सेवा को भारतीय संस्कारों से जोड़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में यात्रा और सेवा दोनों सामाजिक संस्कारों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं से लोगों की सेवा को अपना मुख्य उद्देश्य बनाने और अपने कार्यों के माध्यम से सेवा का संदेश देने को कहा।
उन्होंने ‘सेवा परमो धर्मः’ के भाव के साथ आगे बढ़ने की बात कही। यात्रा के प्रतिभागियों ने भी प्रधानमंत्री के साथ संवाद के दौरान अपने अनुभव साझा किए।
युवाओं से ‘शक्ति की सप्त धाराओं’ पर संवाद का आह्वान
प्रधानमंत्री ने यात्रा में शामिल प्रतिभागियों से ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समाधानों को समझने की अपील की। उन्होंने ‘विविधता में एकता’ के भारतीय दर्शन को देशभर में पहुंचाने पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी ने युवाओं से यात्रा के दौरान लोगों से ‘शक्ति की सप्त धाराओं’ के बारे में बातचीत करने को कहा। उनके अनुसार, इन विचारों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
इस दौरान यात्रा में शामिल युवाओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में मिले अनुभव प्रधानमंत्री के साथ साझा किए और यात्रा के दौरान हुए संवाद तथा सेवा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।



