ऑपरेशन सिंदूर की अंदरूनी कहानी, ड्रोन और मिसाइल हमलों से पाकिस्तान को भारी नुकसान

नई दिल्ली : नई दिल्ली में भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहली बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ भारत की सबसे सटीक और समन्वित सैन्य कार्रवाइयों में से एक साबित हुआ, जिसमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर दुश्मन के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
सेना अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान पिछले वर्ष हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना ने सीमापार कई सैन्य अड्डों और हवाई ठिकानों पर सटीक हमले किए। दावा किया गया कि इस ऑपरेशन में दुश्मन के कई लड़ाकू विमान नष्ट हुए और अनेक सैन्य ढांचे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि पूरे अभियान की योजना अत्याधुनिक तकनीक और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस के आधार पर तैयार की गई थी। ऑपरेशन में बड़ी संख्या में स्वदेशी रक्षा उपकरणों और मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी मजबूती मिली।
भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मिशन के दौरान दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई और हर लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना शांति और संतुलन में विश्वास रखती है, लेकिन देश की सुरक्षा को चुनौती मिलने पर जवाब निर्णायक होता है।
वहीं भारतीय नौसेना ने भी इस अभियान में अहम भूमिका निभाई। नौसेना के अधिकारियों के अनुसार समुद्री क्षेत्र में रणनीतिक तैनाती कर दुश्मन की गतिविधियों पर दबाव बनाया गया। युद्धपोतों और पनडुब्बियों की मौजूदगी से समुद्री मार्गों की निगरानी मजबूत की गई, जिससे विरोधी पक्ष पर अतिरिक्त दबाव बना।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध में तीनों सेनाओं के तालमेल और तकनीकी क्षमता का नया उदाहरण पेश किया है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य में भी भारत किसी भी सुरक्षा चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और सीमाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।


