जल जीवन मिशन पर CAG की रिपोर्ट से खुली पोल, कई जिलों में ‘हर घर जल’ लक्ष्य अधूरा, करोड़ों खर्च के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियों और लापरवाहियों को उजागर किया है। वर्ष 2026 की रिपोर्ट (संख्या-02) में मार्च 2024 तक की स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि राज्य में “हर घर जल” का लक्ष्य अभी भी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है, जबकि इस योजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
योजना का लक्ष्य और वर्तमान स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर तक कार्यशील नल कनेक्शन पहुंचाना था।
राज्य में प्रारंभ में मात्र 3.20 लाख ग्रामीण घरों (6%) में ही नल कनेक्शन था।
मार्च 2024 तक यह संख्या बढ़कर 38.97 लाख (78%) हो गई।
इसके लिए ₹11,034.26 करोड़ खर्च किए गए।
इसके बावजूद लक्ष्य के अनुरूप पूर्ण कवरेज नहीं हो पाया है।
योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी कमी
स्वीकृत 29,153 योजनाओं में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूर्ण हो सकीं।
इनमें से भी केवल 32 योजनाएं पंचायतों को सौंपी गईं।
राज्य के 19,656 गांवों को “हर घर जल” प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64%) ही प्रमाणित हो पाए।
जिलों में असमान प्रगति
33 जिलों के 146 विकासखंडों में किसी भी ब्लॉक ने 100% लक्ष्य हासिल नहीं किया।
18 जिलों में कनेक्शन कवरेज 76% से 98% के बीच रहा।
वहीं 15 जिलों में यह आंकड़ा 56% से 74% के बीच सीमित रहा।
बेमेतरा (98%) और बलौदाबाजार (76%) अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन वाले जिले रहे।
योजना निर्माण और समन्वय में खामियां
CAG ने पाया कि—
ग्राम, जिला और राज्य स्तर पर योजनाओं में समन्वय का अभाव रहा।
कई योजनाएं बिना उचित ग्राम कार्य योजना के तैयार की गईं।
पंचायतों की भागीदारी और तकनीकी सहायता में भी कमी रही।
राज्य स्तर पर जल सुरक्षा के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई।
वित्तीय प्रबंधन पर सवाल
मिशन की धीमी प्रगति के कारण राज्य को ₹3,285.38 करोड़ (केंद्र) और ₹3,194.66 करोड़ (राज्य) की कुल ₹6,480.04 करोड़ राशि का पूरा उपयोग नहीं हो पाया।
वार्षिक कार्य योजनाएं समय पर नहीं बनने से कार्य प्रभावित हुआ।
तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी खामियां
सोलर आधारित जल योजनाओं में ओवरलोडिंग के कारण 28,984 घरों को न्यूनतम जल आपूर्ति भी नहीं मिल पाई।
जल गुणवत्ता जांच के लिए राज्य में 75 प्रयोगशालाओं में से केवल 4 ही मानक स्तर की पाई गईं।
केवल 37% लैब्स को ही राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त थी।
मुख्य निष्कर्ष
CAG की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि—
भारी खर्च के बावजूद योजना का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ।
“हर घर जल” का लक्ष्य अभी दूर है।
योजना में प्रबंधन, निगरानी और तकनीकी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर संभव
यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने के बाद राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। विपक्ष सरकार पर योजना के खराब क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है, वहीं सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।
करोड़ों खर्च, फिर भी हर घर तक पानी नहीं—CAG रिपोर्ट से सरकार की कार्यशैली पर उठे सवाल”



