राजस्व पटवारी संघ का जिला स्तरीय धरना, 17 अगस्त के बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी

बलौदाबाजार | राजस्व पटवारी संघ (छ.ग.) के प्रांतीय आह्वान पर आज जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के दशहरा मैदान में जिले के पटवारियों ने अपनी दो सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान जिलेभर के पटवारियों ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम तहसीलदार बलौदाबाजार श्री निवेश कुरेटी को ज्ञापन सौंपा।
प्रमुख मांगें एवं उठाये गए बिंदु:
1. पदोन्नति का अधिकार:
संभाग अध्यक्ष भावेश वर्मा एवं जिला अध्यक्ष रसपाल सिंह सेन ने बताया कि पटवारी संघ की सबसे महत्वपूर्ण मांग ‘पदोन्नति’ (Promotion) है।
समानता का अधिकार: अन्य विभागों की तर्ज पर पटवारियों को भी पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए। वर्तमान में स्थिति यह है कि पटवारी जिस पद पर भर्ती होता है, उसी पद से सेवानिवृत्त (Retire) हो जाता है।
जिले के आंकड़े: बलौदाबाजार जिले में कार्यरत 203 पटवारियों में से 22 पटवारी ऐसे हैं जो पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से और 8 पटवारी 20 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक पदोन्नति नहीं मिली।
संघ की मांग: राजस्व निरीक्षक (RI) के पदों पर 50% पद वरिष्ठता के आधार पर और 50% पद विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरकर शीघ्र पदोन्नति दी जाए।

2. वेतन विसंगति का निराकरण:
वर्ष 2017-18 में पटवारियों का ग्रेड पे 2200 से बढ़ाकर 2400 रुपये किया गया था, लेकिन इसके अनुरूप मूल वेतन (Basic Pay) का निर्धारण अब तक नहीं हो सका है।
इसके कारण अधिकांश पटवारियों के वेतन में गंभीर विसंगतियां आ गई हैं, जिससे उन्हें निरंतर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
साथ ही, कोष एवं लेखा (Treasury) में सर्विस बुक के सत्यापन में भी तकनीकी व प्रशासनिक समस्याएं आ रही हैं, जिसका तत्काल निराकरण किया जाना आवश्यक है।
कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का मिला समर्थन
धरना स्थल पर कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रांताध्यक्ष एवं लवन तहसीलदार श्री पेखन टोन्ड्रे ने पहुंचकर पटवारियों के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने मंच से कहा कि “पटवारी संघ की दोनों मांगें पूरी तरह जायज हैं और हमारा संघ इस लड़ाई में पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।”
आगे की रणनीति और चेतावनी
पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत है।
”आने वाले दिनों में संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, वित्त मंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व सचिव, संचालक एवं जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत कराएगा। यदि इसके बाद भी शासन द्वारा उचित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 17 अगस्त 2026 के बाद प्रांतीय संघ की बैठक में आगे के बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।”



