महंगा तेल बना वैश्विक खतरा, IMF ने दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने गंभीर चिंता जताई है। संस्था की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में जारी तनाव लंबा चलता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
IMF और विश्व बैंक की हालिया स्प्रिंग मीटिंग में उन्होंने बताया कि फरवरी के अंत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बाधाओं ने ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। यह मार्ग तेल और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने से खासतौर पर आयात पर निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
जॉर्जीवा ने चेतावनी दी कि यदि उर्वरकों की उपलब्धता जल्द सामान्य नहीं होती, तो इसका सीधा असर खाद्य कीमतों पर दिखाई देगा। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है, और इसका सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ेगा जहां लोगों की आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है।
उन्होंने केंद्रीय बैंकों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव करना सही नहीं होगा। जिन देशों में महंगाई नियंत्रण में है, वे फिलहाल स्थिति पर नजर रखें, जबकि जिन देशों में आर्थिक भरोसा कमजोर है, वहां सख्त नीतियां अपनानी पड़ सकती हैं।
IMF ने यह भी संकेत दिया है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो वह सदस्य देशों को वित्तीय मदद देने के लिए तैयार है। फिलहाल कई देशों में उसके कार्यक्रम चल रहे हैं और आगे और सहायता की जरूरत पड़ सकती है। अनुमान है कि अतिरिक्त फंडिंग की मांग अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।
संस्था ने सरकारों को यह भी आगाह किया कि आम लोगों को राहत देने के उपाय सोच-समझकर किए जाएं। बिना योजना के उठाए गए कदम—जैसे निर्यात पर रोक या बड़े पैमाने पर कर कटौती—महंगाई को और बढ़ा सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति और जटिल हो सकती है।



