
भाटापारा। जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा 30 जून 2026 को जारी आदेश के बावजूद कई संलग्न शिक्षक एवं कर्मचारी अब तक अपने मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं लौटे हैं। विभागीय आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनकी मूल संस्था में भेजा जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुचारु हो सके।
हालांकि आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी कुछ शिक्षक और कर्मचारी अब भी संलग्न कार्यालयों में कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में विभागीय आदेशों के पालन और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। चर्चा है कि यदि आदेश के बावजूद कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना पर नहीं लौट रहे हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
जानकारों का कहना है कि जिले के कई स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों का कार्यालयों में संलग्न रहना विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है। इससे शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग अपने ही आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेगा या फिर सरकारी निर्देश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे? यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो विभागीय आदेशों की गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक होगा।


डीईओ ने दी सफाई
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी संदीप शर्मा से दूरभाष पर चर्चा किए जाने पर उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर कार्यभार संभालने के लिए शिक्षक अभी तक नहीं पहुंचे हैं, इसलिए प्रक्रिया रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में 13 शिक्षकों के अलावा अन्य विभागों एवं स्थानों पर भी संलग्न शिक्षकों की सूची मंगाई गई है। जहां शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है, वहां आवश्यक व्यवस्था बनने के बाद संबंधित शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाएगा।
अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर
शिक्षा जगत, अभिभावकों और आम लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी अपने आदेश का शत-प्रतिशत पालन कब तक सुनिश्चित कराते हैं। आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई यह तय करेगी कि आदेशों का पालन वास्तव में होता है या वे केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।




