पानी के मुद्दे पर भारत को फिर धमकाने लगा पाकिस्तान, शहबाज ने कहा- जवाब देने में देर नहीं करेंगे

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को लेकर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शहबाज ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान के पानी का प्रवाह रोकने या कम करने की कोशिश की गई तो इसका जवाब दिया जाएगा।
इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कश्मीर मुद्दे पर भी पाकिस्तान के पुराने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भी तारीफ की और दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत का मुकाबला किया।
1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता छह प्रमुख नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़ा है। 19 सितंबर 1960 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
समझौते के तहत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी के इस्तेमाल का अधिकार भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का मुख्य हिस्सा पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने निलंबित किया समझौता
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला किया था। इसके बाद से जल समझौता दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई किए जाने तक समझौते पर रोक जारी रहेगी। वहीं पाकिस्तान लगातार भारत के इस कदम का विरोध करता रहा है और इसे एकतरफा फैसला बताता है।
पानी की कमी को लेकर पाकिस्तान में चिंता
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में जल उपलब्धता में कमी का असर खेती, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जाती है।
सिंध और बलूचिस्तान सहित कई क्षेत्रों में जल संकट को लेकर चिंता बनी हुई है। सिंचाई के लिहाज से महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज में पानी के स्तर को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
चीन को बताया पाकिस्तान का ‘अजीम दोस्त’
शहबाज शरीफ ने चीन-पाकिस्तान संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने चीन को पाकिस्तान का बेहद करीबी मित्र बताते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में चीन हमेशा पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को बेहद मजबूत बताया।
ट्रंप की भूमिका का दावा दोहराया
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का दावा भी दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी पहल के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम संभव हुआ।
हालांकि, भारत इस दावे से अलग रुख रखता है। भारत के अनुसार युद्धविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क और बातचीत के बाद हुआ था तथा इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।
कश्मीर और फिलिस्तीन का भी किया जिक्र
शहबाज शरीफ ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि उनकी सरकार इस नीति में बदलाव नहीं करेगी। उन्होंने कश्मीरियों की कुर्बानियों का भी जिक्र किया।
इसके अलावा उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों के समर्थन की बात कही। अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए शहबाज ने वहां की अंतरिम सरकार से अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देने की अपील की। उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में भूमिका निभाई है।



