नोटिस की प्रतियां जलाकर भड़के पटवारी, शासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

बलौदाबाजार। निलंबन और ब्रेक-इन-सर्विस के नोटिस ने पटवारियों के आंदोलन में आग में घी डालने का काम किया है। शासन की कार्रवाई से आक्रोशित राजस्व पटवारी संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप के नेतृत्व में आंदोलनरत पटवारियों ने नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया और चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के बैनर तले 12 अक्टूबर 2026 से चार सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल जारी है। संघ के अनुसार, राज्य स्थापना दिवस एक नवंबर को प्रदेशभर के करीब पांच हजार पटवारियों को ब्रेक-इन-सर्विस एवं निलंबन संबंधी नोटिस जारी किए गए। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप के निलंबन से पटवारियों का गुस्सा और बढ़ गया है।

नोटिस जलाकर जताया विरोध
इसी सिलसिले में प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप दोपहर 12 बजे बलौदाबाजार पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत पटवारियों को संबोधित किया। उनके नेतृत्व में जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के पटवारियों ने शासन के नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
भागवत कश्यप ने कहा कि पटवारी संघ शासन की कार्रवाई से डरने वाला नहीं है। संघ अपनी मांगों और पीवी ऐप (PV App) से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्याओं पर संवाद कर समाधान निकालने के बजाय शासन निलंबन और ब्रेक-इन-सर्विस जैसी कार्रवाई कर रहा है।
मांगें पूरी होने तक पीछे हटने से इनकार
संघ पदाधिकारियों के मुताबिक, चार सूत्रीय मांगों में पदोन्नति, वेतन विसंगति और अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए और लंबित मांगों का निराकरण किया जाना चाहिए।
संघ ने साफ किया कि जब तक शासन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन और जेल भरो आंदोलन भी शुरू किया जाएगा।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिष कुमार सर्वे, प्रांतीय संयोजक बृजेश राजपूत, रायपुर संभाग अध्यक्ष भावेश वर्मा, जिला अध्यक्ष रसपाल सिंह सहित जिले के आंदोलनरत पटवारी उपस्थित रहे।
अब शासन के रुख पर निगाहें
नोटिस जारी होने के बाद पटवारियों का आंदोलन थमने के बजाय और तेज होने के संकेत दे रहा है। दूसरी ओर, हड़ताल के चलते राजस्व संबंधी कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है। अब सवाल यह है कि शासन सख्ती जारी रखेगा या पटवारियों से बातचीत कर गतिरोध खत्म करने की पहल करेगा।



