‘पत्रकारिता में सत्य और जनहित सर्वोपरि’, राज्यपाल डेका ने AI-मीडिया शोध केंद्र का किया उद्घाटन

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति रही।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल डेका ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा एवं प्रतिभा विकास में भी सहायक होगा।
AI के दौर में मीडिया में तेजी से बदलाव
राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। उन्होंने स्वर्गीय ठाकरे के सानिध्य में बिताए अवसरों और उनसे मिले प्रेरणादायी विचारों को भी साझा किया।
‘खबर से पहले तथ्य की पुष्टि जरूरी’
राज्यपाल डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में सत्य, तथ्य और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि करना आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सूचनाओं का प्रसार बेहद तेजी से हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर सामग्री सत्य हो, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचार प्रसारित करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं है जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।
अनसुने नायक-नायिकाओं को सामने लाने की जरूरत
प्रिंट मीडिया के महत्व पर राज्यपाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, AI और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया समाज में एक विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचान नहीं बना सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
विश्वविद्यालय में एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी, विभागाध्यक्ष प्रबंधन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।



