संसद में E20 फ्यूल पर सरकार ने रखे तथ्य, बिना इथेनॉल पेट्रोल की कीमत भी बताई

नई दिल्ली। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर संसद में सरकार ने बड़ा खुलासा किया है। सरकार ने बताया कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जाती, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश में पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था। इथेनॉल मिश्रण नीति ने न केवल आम लोगों को महंगे पेट्रोल से राहत दी है, बल्कि तेल आयात पर निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभाई है।
लोकसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में बताया कि मध्य-पूर्व में तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। ऐसे हालात में बिना इथेनॉल वाले पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो सकती थी। हालांकि, इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति, पर्याप्त कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल कंपनियों की खरीद रणनीति के कारण देश में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया गया।
E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का दावा गलत
सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब होने की आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं। सरकार के अनुसार, E20 ईंधन को देशभर में लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), वाहन निर्माता कंपनियों, इंडियन ऑयल और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर व्यापक परीक्षण किए गए थे।
इन परीक्षणों में वाहनों की क्षमता, प्रदर्शन और इंजन के विभिन्न पुर्जों पर किसी भी तरह का बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया।
करोड़ों वाहन कर रहे हैं इस्तेमाल
सरकार ने बताया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग भारत में कई वर्षों से किया जा रहा है। वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं।
सरकार के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर इस्तेमाल के बावजूद इंजन में जंग लगने, खराब होने या पुर्जों के जल्दी घिसने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण नीति से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिली है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।



