प्राइवेट स्कूलों को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने फीस नियमों में दी छूट

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी और गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए पहले से सरकारी मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व अनुमति केवल तभी जरूरी होगी जब कोई स्कूल चल रहे शैक्षणिक सत्र के दौरान फीस बढ़ाना चाहता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि किसी स्कूल के पास सरप्लस फंड होना मात्र इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहा है।
हालांकि अदालत ने साफ किया कि नई फीस संरचना 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू की जा सकेगी और किसी भी स्कूल को पिछली तारीख से फीस या अन्य शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई स्कूल सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा निदेशालय को इसकी जानकारी देनी होगी, लेकिन DoE स्कूलों के रोजमर्रा के वित्तीय मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता और न ही उन्हें माइक्रो-मैनेज कर सकता है।
फैसले में यह भी कहा गया कि निजी और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस तय करने में DoE के अधिकार सीमित हैं। केवल अधिक धनराशि होने के आधार पर किसी स्कूल पर मुनाफाखोरी का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल बीच सत्र में फीस बढ़ाने का प्रस्ताव देता है, तो उसे कम से कम दो महीने पहले DoE को सूचित करना होगा और विभाग को भी दो महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि समयसीमा में निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रस्ताव स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
यह मामला तब सामने आया जब दिल्ली के 137 निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 2016-17 से 2022-23 के बीच उनके फीस बढ़ोतरी प्रस्ताव खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सरकार के आदेशों को “गलतफहमी पर आधारित” बताते हुए रद्द कर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी जमीन ‘लैंड क्लॉज’ के तहत चल रहे स्कूलों पर भी सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ोतरी के यही नियम लागू होंगे।



