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छत्तीसगढ़भाटापारा

450 तालाब भरे, 128 प्रगतिरत… लेकिन भाटापारा अब भी उपेक्षित! कागजों में राहत, जमीनी हकीकत पर सवाल

संवददाता:- तुलसी राम जायसवाल भाटापारा

भाटापारा/बलौदाबाजार:जिले में निस्तारी संकट से राहत देने के दावे भले ही तेज़ी से किए जा रहे हों, लेकिन भाटापारा के हालात अब भी सवालों के घेरे में हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि महानदी जलाशय परियोजना की नहरों के माध्यम से अब तक 450 तालाबों में पानी भरा जा चुका है, जबकि 128 तालाबों में कार्य प्रगति पर है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार जिले के 384 गांवों के कुल 683 तालाबों को भरने का लक्ष्य तय किया गया है। कागजों में यह आंकड़ा राहत की तस्वीर पेश करता है, लेकिन भाटापारा शहर के लोग खुद को इस योजना से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
शहरवासियों का आरोप है कि भाटापारा के कई तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं, तो कई तालाबों में पानी भरने की कोई ठोस व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की यह योजना सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित है?

लोगों का कहना है कि हर बार की तरह इस बार भी भाटापारा को नजरअंदाज किया जा रहा है और केवल आंकड़ों के सहारे उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं। जबकि शहर में निस्तारी की समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है।

हाल ही में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बलौदाबाजार विकासखंड के गांवों का दौरा कर तालाबों और नहरों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को पानी के दुरुपयोग पर रोक लगाने और कड़ी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। लेकिन भाटापारा के लोगों को अब भी इंतजार है कि कब उनके शहर के तालाबों की सुध ली जाएगी।

शहरवासियों की साफ मांग है कि यदि वास्तव में निस्तारी समस्या का समाधान करना है, तो भाटापारा के अतिक्रमित तालाबों को मुक्त कराकर उनमें पानी भरने की ठोस व्यवस्था की जाए। अन्यथा हर साल की तरह इस बार भी “राहत” सिर्फ सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।

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Kailash Jaiswal

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