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एयर एंबुलेंस क्रैश: रांची से दिल्ली जा रही फ्लाइट चतरा जंगल में गिरी, 7 की मौत

रांची/चतरा। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया है। रांची से दिल्ली जा रही मेडिकल इमरजेंसी फ्लाइट खराब मौसम की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में पायलट, सह-पायलट, मेडिकल टीम, मरीज और परिजन समेत सात लोगों की जान चली गई।

मौसम बना काल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान ने शाम लगभग 7 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद मौसम अचानक खराब हो गया। तेज हवाएं और कम दृश्यता के कारण पायलट को दिशा बदलने की कोशिश करनी पड़ी। करीब 20 से 25 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इसके कुछ देर बाद विमान चतरा के करमटांड़ जंगल क्षेत्र में गिर गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

इलाज की उम्मीद, लेकिन रास्ते में ही अंत

इस फ्लाइट में एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। परिवार ने एयर एंबुलेंस की व्यवस्था के लिए बड़ी रकम जुटाई थी। उम्मीद थी कि राजधानी में उन्नत इलाज से जान बच जाएगी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

हादसे में एक युवा डॉक्टर भी शामिल थे, जो अपनी सेवा के दौरान इस उड़ान में थे। वे एक साधारण परिवार से थे और संघर्ष कर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई थी। उनके असामयिक निधन से परिवार और सहकर्मियों में शोक की लहर है।

इसके अलावा एक किशोर भी इस यात्रा का हिस्सा था, जो अपने परिजन के साथ दिल्ली जा रहा था। उसके सपने और भविष्य भी इस दुर्घटना में खत्म हो गए।

दुर्गम इलाके में राहत अभियान

विमान सड़क से कई किलोमीटर अंदर जंगल में गिरा था। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें मौके पर पहुंचीं। घने जंगल और अंधेरे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। जवानों को मलबे तक पैदल पहुंचना पड़ा और शवों को बाहर लाने के लिए लंबा अभियान चलाना पड़ा। बाद में सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

जांच के आदेश

प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। मौसम की भूमिका और तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। विशेषज्ञों की टीम ब्लैक बॉक्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हादसे की वजह तलाशेगी।

यह हादसा केवल एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए गहरा आघात है जिन्होंने अपनों को बेहतर इलाज या कर्तव्य निभाने के दौरान खो दिया। सिमरिया के जंगलों में बिखरा मलबा उस दर्दनाक रात की कहानी बयान कर रहा है, जिसने सात जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

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Kailash Jaiswal

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