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आंख, दिमाग और शरीर की सेहत के लिए 30–45 मिनट का ब्रेक क्यों है जरूरी?

Office Workers Health : आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में कंप्यूटर और लैपटॉप पर लगातार काम करना आम बात हो गई है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से लोगों में गर्दन जकड़ना, पीठ में खिंचाव और सर्वाइकल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही बैठने का तरीका और काम के बीच नियमित ब्रेक इन दिक्कतों से बचाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार काम करते समय शरीर का पोस्चर संतुलित होना बेहद जरूरी है। कुर्सी पर बैठते समय पीठ को सीधा रखें और कमर को पूरा सहारा मिलना चाहिए। कंधों को ढीला रखें और गर्दन पर अतिरिक्त दबाव न पड़ने दें। स्क्रीन की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि आंखें सीधे सामने देखें, जिससे गर्दन को झुकाने या ऊपर उठाने की जरूरत न पड़े।

लैपटॉप पर काम करने वालों को खासतौर पर सावधान रहने की सलाह दी जाती है। लैपटॉप की स्क्रीन नीचे होने के कारण अक्सर लोग गर्दन झुकाकर काम करते हैं, जिससे ‘टेक नेक’ की समस्या हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए लैपटॉप स्टैंड का उपयोग करना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही कीबोर्ड और माउस की स्थिति ऐसी रखें कि हाथ आरामदायक कोण में रहें और कंधों पर जोर न पड़े।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज करने की भी सलाह देते हैं। गर्दन और कंधों की स्ट्रेचिंग से मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और थकान कम होती है। इसके अलावा हर 30 से 45 मिनट में कुर्सी से उठकर थोड़ा चलना-फिरना शरीर के लिए जरूरी बताया जाता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और जकड़न से राहत मिलती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सही कुर्सी का चयन, पैरों को जमीन पर सपाट रखना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठना, लंबे समय में गंभीर दर्द की समस्या से बचा सकते हैं। यदि फिर भी दर्द बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

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Kailash Jaiswal

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