शांति वार्ता पर तनाव, समझौता नहीं हुआ तो युद्ध की चेतावनी

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और चीन को लेकर नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जानकारी दी कि चीन ने फिलहाल संघर्ष विराम की अवधि में ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराने का भरोसा दिया है।
पेंटागन में आयोजित प्रेस वार्ता में हेगसेथ ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ईरान से अपील की कि वह टकराव के बजाय शांति का रास्ता चुने, अन्यथा हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।
ईरान पर बढ़ा दबाव
अमेरिका ने तेहरान पर अपना रुख और सख्त करते हुए संकेत दिया है कि अगर उसने समझौते की दिशा में कदम नहीं बढ़ाए, तो उस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसमें आर्थिक नाकेबंदी के साथ-साथ रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
समुद्री गतिविधियों पर कड़ी नजर
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े जहाजों की निगरानी तेज कर दी गई है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि वाले जहाज को रोका जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेंगे।
नाकेबंदी का विस्तार
अमेरिकी नौसेना ने अब उन जहाजों को भी अपने दायरे में लिया है, जिन पर अवैध या संदिग्ध सामान ढोने का शक है। ऐसे जहाजों की तलाशी, जब्ती और जांच की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी की जा सकती है।
मध्य पूर्व में बढ़ती इस सैन्य सक्रियता का असर वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।



