मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने ईरान को दी सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया गया तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी घटना को युद्ध शुरू करने की पर्याप्त वजह माना जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है तथा उसके नेतृत्व ढांचे पर भी गंभीर असर पड़ा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के कई सैन्य संसाधन नष्ट हो चुके हैं और अमेरिका के पास इसके प्रमाण मौजूद हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से जुड़े घटनाक्रमों की मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कुछ मीडिया संस्थान ईरान की वास्तविक स्थिति को कमतर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य में किसी भी सैन्य टकराव की जिम्मेदारी ईरान के कदमों पर निर्भर करेगी।
इसी बीच अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने 215 के मुकाबले 208 वोटों से एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने से रोकना है। इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों का भी समर्थन मिला।
प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों और डेमोक्रेट्स ने मिलकर उनकी युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश की है, जबकि वह ईरान के साथ तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के प्रयासों में जुटे हैं।
ट्रंप के इस बयान और कांग्रेस में हुए घटनाक्रम के बाद अमेरिका-ईरान संबंधों के साथ-साथ राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां और सुरक्षा संबंधी चर्चाएं वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी रह सकती हैं।



