सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त, नड्डा से बातचीत के बाद बनी सहमति

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपना 23 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया। वांगचुक के अनशन समाप्त होने के साथ फिलहाल आंदोलन का यह चरण खत्म हो गया है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार के साथ आगे भी संवाद जारी रहने की उम्मीद है।
अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने उनके शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), पोटैशियम का स्तर काफी कम होने और कीटोन लेवल बढ़ने पर चिंता जताई थी। अस्पताल में उपचार के दौरान भी उन्होंने अपनी मांगों पर सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई।
इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने 18 जुलाई को वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भूख हड़ताल शुरू की थी। बताया गया कि कथित रूप से आत्महत्या करने वाले एक NEET अभ्यर्थी के पिता ने उनसे मुलाकात कर अनशन समाप्त करने की अपील की। साथ ही सोनम वांगचुक के अनुरोध के बाद दिपके ने भी अपना अनशन खत्म कर दिया।
हालांकि, अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
वांगचुक की प्रमुख मांगें
पहली मांग:
सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से शिक्षा संबंधी विवादों, विशेष रूप से परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना है कि केवल जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था में ठोस सुधार जरूरी हैं।
दूसरी मांग:
यदि सरकार उनकी पहली मांग पर तत्काल निर्णय नहीं लेती है, तो उन्हें और उनके साथियों को संसद जाकर विभिन्न दलों के सांसदों से अपनी बात रखने की अनुमति दी जाए, ताकि इस मुद्दे को संसद में उठाया जा सके।
तीसरी मांग:
यदि स्वास्थ्य कारणों से वे संसद नहीं जा सकते, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा दें कि उनकी मांगों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा। ऐसा आश्वासन मिलने पर भी उन्होंने अनशन समाप्त करने की बात कही थी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर
सोनम वांगचुक ने दोहराया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद और लगातार सामने आ रही अनियमितताएं लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने सरकार और सभी राजनीतिक दलों से शिक्षा के मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठाकर गंभीरता से समाधान निकालने की अपील की।



