RO.NO. 01
देशव्यापार

प्याज की बढ़ती कीमतों ने निकाले आंसू, जानिए कब सस्ते हो सकते हैं दाम

नई दिल्ली। देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में प्याज के दामों में तेजी से इजाफा हुआ है। सरकारी उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 21 सितंबर को प्याज की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि करीब एक महीने पहले यही कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी।

थोक बाजार में भी प्याज के भाव में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। 21 सितंबर को मंडियों में प्याज की औसत थोक कीमत 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल रही। एक साल पहले इसी अवधि में यह भाव 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह सालाना आधार पर थोक कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े प्याज के दाम

देश के प्रमुख शहरों में भी प्याज महंगा हो गया है। दिल्ली में एक साल पहले करीब 32 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 53 रुपये किलो तक पहुंच गया है। मुंबई में कीमत 30 रुपये से बढ़कर 58 रुपये, चेन्नई में 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये और रांची में 25 रुपये से बढ़कर 57 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

बारिश और स्टॉक खराब होने का असर

प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन और भंडारण से जुड़े कई कारण बताए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को मार्च में हुई बेमौसम बारिश से नुकसान पहुंचा था। वहीं, केंद्रीय एजेंसियों के बफर स्टॉक में रखे प्याज का एक हिस्सा खराब होने की वजह से उपलब्धता पर भी असर पड़ा है।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग कमजोर बनी हुई है। बांग्लादेश में प्याज के उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।

बीज कंपनियों की खरीद खत्म होने के बाद मिल सकती है राहत

बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पिछले करीब एक सप्ताह से प्याज की कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिल रही है। फिलहाल मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की मांग में बीज कंपनियों की खरीद की भी अहम भूमिका है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों की थोक खरीद पूरी होने के बाद प्याज के भाव में प्रति किलो 5 से 10 रुपये तक की नरमी आ सकती है।

नई फसल की आवक से कीमत घटने की उम्मीद

प्याज की कीमतों में होने वाला मौसमी उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से फसल चक्र और मंडियों में आवक पर निर्भर करता है। रबी सीजन की प्याज मार्च-अप्रैल में मंडियों में आती है, जिसे लंबे समय तक भंडारित किया जाता है। इसके बाद खरीफ सीजन की नई फसल आने तक बाजार की आपूर्ति पुराने स्टॉक से होती है।

अगस्त से जनवरी के बीच पुराने स्टॉक में कमी आने के साथ मंडियों में आवक घटती है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में खरीफ सीजन की नई प्याज की आवक बढ़ने की उम्मीद है। यदि मंडियों में आवक सामान्य रही तो आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों में गिरावट आ सकती है और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है।

Share this
advertisement

Kailash Jaiswal

"BBN24 News - ताजा खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत! पढ़ें छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया की ब्रेकिंग न्यूज, राजनीति, खेल, व्यवसाय, मनोरंजन और अन्य अपडेट सबसे पहले।"

Related Articles

Back to top button