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ऑल पार्टी मीटिंग में पाकिस्तान पर निशाना: जयशंकर बोले—भारत किसी का दलाल देश नहीं

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जबकि गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इसमें शामिल हुए।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार आश्वस्त

बैठक के दौरान सरकार ने सभी दलों को भरोसा दिलाया कि देश में ऊर्जा संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे गैस की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की सुरक्षा पर जानकारी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे कुछ जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं और बाकी जहाजों को निकालने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए दूतावास लगातार सक्रिय हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

पाकिस्तान की भूमिका पर भी चर्चा

बैठक के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। इस पर सरकार ने कहा कि पाकिस्तान का ऐसा रवैया नया नहीं है और वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। विदेश मंत्री ने साफ कहा कि भारत किसी भी स्थिति में “दलाल देश” की भूमिका नहीं निभाएगा और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के आधार पर ही फैसले लेगा।

मध्यस्थता के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर ईरान से जुड़े तनाव को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी, जिसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साझा किया था। इस पर सरकार ने कहा कि अगर अमेरिका को पाकिस्तान के जरिए बातचीत उपयोगी लगती है तो यह उसका फैसला है, लेकिन भारत अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक नीति पर कायम रहेगा।

विदेश नीति पर सरकार का पक्ष

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि भारत सक्रिय कूटनीति के जरिए सभी संबंधित देशों के साथ संवाद बनाए हुए है। साथ ही यह भी कहा गया कि कई बार कूटनीति में चुप्पी भी एक रणनीति होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत निष्क्रिय है।

सरकार ने साफ किया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश के हितों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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Kailash Jaiswal

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