महिला T20 वर्ल्ड कप में भारत का अभियान समाप्त, इन वजहों से टूटा खिताब का सपना

सिडनी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम का टी20 विश्व कप 2026 अभियान ग्रुप चरण में ही समाप्त हो गया। सिडनी में खेले गए निर्णायक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के साथ भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। इस बार नॉकआउट चरण में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ने जगह बनाई, जबकि पिछले वर्ष वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।
टीम इंडिया के प्रदर्शन की समीक्षा करें तो कई ऐसी कमजोरियां सामने आईं, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में उसके अभियान को प्रभावित किया।
रणनीति पर उठे सवाल
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ‘करो या मरो’ मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, जबकि पिच पर बाद में बल्लेबाजी करना अधिक कठिन माना जा रहा था। 170 रन का स्कोर बनाने के बावजूद टीम उस लक्ष्य का प्रभावी ढंग से बचाव नहीं कर सकी। मुख्य कोच अमोल मजूमदार और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी माना कि टीम की टी20 रणनीति में सुधार की जरूरत है।
तेज गेंदबाजी रही सबसे बड़ी कमजोरी
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय तेज गेंदबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। शुरुआती विकेट लेने और विपक्षी टीम पर दबाव बनाने में पेस अटैक पूरी तरह विफल रहा। स्पिन गेंदबाजों ने मध्य ओवरों में जिम्मेदारी निभाई, लेकिन तेज गेंदबाजी की कमी टीम पर भारी पड़ी।
खराब फील्डिंग ने बिगाड़े कई मुकाबले
भारतीय टीम की फील्डिंग भी पूरे विश्व कप में चिंता का विषय रही। बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ कई आसान कैच छोड़े गए, जबकि पूरे सीजन में लगातार खराब कैचिंग ने गेंदबाजों की मेहनत पर पानी फेर दिया। महत्वपूर्ण मौकों पर मिली अतिरिक्त जिंदगी का विरोधी टीमों ने पूरा फायदा उठाया।
बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव
टूर्नामेंट के दौरान बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेमिमा रोड्रिग्स संघर्ष करती रहीं, लेकिन उन्हें देर से रिटायर्ड आउट किया गया, जिससे विस्फोटक बल्लेबाज ऋचा घोष को अंतिम ओवरों में केवल एक गेंद खेलने का अवसर मिला। इससे टीम की रन गति प्रभावित हुई।
डेथ ओवरों में बिखरी टीम
भारत बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में अंतिम ओवरों के दबाव को संभालने में नाकाम रहा। कई मैचों में आखिरी ओवरों में अधिक रन खर्च किए गए, वहीं लक्ष्य का पीछा करते समय जरूरी रन गति बनाए रखना भी मुश्किल साबित हुआ।
स्थायी प्लेइंग इलेवन नहीं मिल सकी
कोचिंग स्टाफ पूरे टूर्नामेंट में सही टीम संयोजन तलाशता रहा। खिलाड़ियों में लगातार बदलाव और चोटों के कारण टीम अपनी सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन तय नहीं कर सकी। श्रेयंका पाटिल की अनुपस्थिति ने गेंदबाजी संतुलन को भी प्रभावित किया।
बड़े मुकाबलों में नहीं चला दांव
भारत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी टीमों को हराया, लेकिन दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ प्रदर्शन फीका रहा। यही दो मुकाबले अंततः टीम के सेमीफाइनल की राह में सबसे बड़ी बाधा बने।
अब आगे की चुनौती
टी20 विश्व कप से निराशाजनक विदाई के बाद भारतीय टीम अब अगले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी करेगी। मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने संकेत दिए हैं कि टीम के ढांचे, रणनीति और संयोजन पर व्यापक समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।



