
नई दिल्ली : नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिकों का ध्यान इस समय बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा पर सबसे ज्यादा केंद्रित है, क्योंकि यहां पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में पानी मौजूद होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि यह चंद्रमा बेहद ठंडा है और इसकी सतह पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई है, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि इस जमी हुई परत के नीचे एक विशाल तरल महासागर छिपा हो सकता है। यही कारण है कि यूरोपा को पृथ्वी से बाहर जीवन की खोज के लिए सबसे संभावित स्थानों में से एक माना जा रहा है।
यूरोपा का आकार भले ही पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा छोटा है, लेकिन यह सूर्य से बहुत दूर स्थित है, जिससे यहां सूरज की रोशनी बेहद कमजोर पहुंचती है। इसी वजह से इसकी सतह पर मौजूद पानी पूरी तरह जमकर कठोर बर्फ में बदल चुका है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां बर्फ इतनी सख्त है कि उसे तोड़ने के लिए भारी मशीनों की जरूरत पड़ेगी। लेकिन सतह के नीचे का वातावरण बिल्कुल अलग हो सकता है। अनुमान है कि बर्फ की मोटी परत के नीचे खारा और गहरा महासागर मौजूद है, जिसमें पृथ्वी से भी ज्यादा पानी हो सकता है।
नासा के पूर्व मिशन डेटा से भी यह संकेत मिले हैं कि यह उपसतही महासागर वास्तविक हो सकता है। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि पृथ्वी पर कुछ सूक्ष्म जीव बिना सूरज की रोशनी के भी कठिन परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं, जिससे यूरोपा पर जीवन की संभावना और मजबूत हो जाती है।
इस चंद्रमा के अंदरूनी हिस्से को गर्म रखने में बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण बड़ा कारण माना जाता है। जब यूरोपा बृहस्पति की परिक्रमा करता है, तो गुरुत्वीय खिंचाव के कारण उसमें लगातार हलचल और घर्षण पैदा होता है, जिससे गर्मी उत्पन्न होती रहती है। यही प्रक्रिया बर्फ के नीचे पानी को तरल बनाए रखती है।
इस खोज को और गहराई से समझने के लिए नासा ने ‘यूरोपा क्लिपर’ मिशन शुरू किया है, जो इस चंद्रमा की सतह, बर्फ की परत और संभावित महासागर का अध्ययन करेगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या यहां जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां वास्तव में मौजूद हैं।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिशन सौर मंडल में जीवन की संभावनाओं को लेकर नई जानकारी देगा और भविष्य में ब्रह्मांड में जीवन की खोज को नई दिशा प्रदान कर सकता है।



