5G की बड़ी उपलब्धि, अब पहले से ज्यादा सटीक मिलेगी लोकेशन की जानकारी

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026। सेल्फ-ड्राइविंग कारों से लेकर डिलीवरी ड्रोन और फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट तक, सटीक लोकेशन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में 5G तकनीक ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। एरिक्सन और मीडियाटेक ने 5G नेटवर्क के जरिए बेहद सटीक लोकेशन ट्रैकिंग का सफल परीक्षण किया है। GNSS RTK तकनीक की मदद से लोकेशन की सटीकता 30 सेंटीमीटर से भी कम तक पहुंचने का दावा किया गया है।
GPS से कई गुना ज्यादा सटीक लोकेशन
आमतौर पर स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक GPS तकनीक किसी स्थान की पहचान में करीब 3 से 5 मीटर तक की त्रुटि दे सकती है। इसके मुकाबले 5G आधारित GNSS RTK तकनीक कहीं ज्यादा सटीक परिणाम देने में सक्षम है।
यह तकनीक सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल में मौजूद छोटी-छोटी त्रुटियों की पहचान कर उन्हें वास्तविक समय में सुधारने का काम करती है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी बेहद महंगे विशेष उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। सामान्य मोबाइल एंटीना और मीडियाटेक के 5G मॉडेम के जरिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
हजारों डिवाइस तक एक साथ पहुंच सकेगा डेटा
नई तकनीक यूनिकास्ट और ब्रॉडकास्ट दोनों तरह की प्रणालियों पर काम कर सकती है। इसके जरिए बड़ी संख्या में डिवाइसों तक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड लोकेशन डेटा एक साथ पहुंचाया जा सकता है। नेटवर्क की स्पीड या कनेक्टिविटी पर इसका असर कम से कम रखने की दिशा में भी परीक्षण किया गया है।
एरिक्सन के प्रतिनिधि जोहान हल्टेल ने इस उपलब्धि को 5G इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्टेशन जैसे क्षेत्रों में इस तकनीक का खास फायदा देखने को मिल सकता है।
ऑटोमेशन और ड्रोन को मिलेगा फायदा
बेहद सटीक लोकेशन सिस्टम का इस्तेमाल भविष्य में स्वायत्त वाहनों, डिलीवरी ड्रोन और औद्योगिक रोबोटिक्स में किया जा सकता है। जहां कुछ सेंटीमीटर का अंतर भी किसी मशीन या वाहन के संचालन को प्रभावित कर सकता है, वहां GNSS RTK जैसी तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
मीडियाटेक के डॉ. एचसी हुआंग ने भी इस साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि 5G की उन्नत क्षमताएं आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबारी और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोल सकती हैं।
इस सफल परीक्षण के बाद 5G नेटवर्क के जरिए हाई-प्रिसीजन लोकेशन सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। आने वाले समय में इससे स्मार्टफोन आधारित नेविगेशन और ऑटोमेशन तकनीकों को भी अधिक सटीकता मिल सकती है।



