
भाटापारा। नगर के प्रसिद्ध श्री महासती मंदिर का 74वां वार्षिकोत्सव इस वर्ष 23 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्य आयोजन 24 अगस्त को होगा, जिसमें दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
वार्षिकोत्सव के मुख्य दिवस 24 अगस्त को सुबह 9 बजे पंचमुखी सुंदरकांड समिति द्वारा सुंदरकांड पाठ किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे मंदिर के मुख्य गर्भगृह में छप्पन भोग अर्पित कर महाआरती की जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को माता के दर्शन एवं विशेष पूजा-अर्चना में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
दोपहर 2 बजे से मंदिर परिसर में रामराज्याभिषेक का विशेष धार्मिक आयोजन होगा। यह कार्यक्रम चित्रकूट के पंडित सनत कुमार मिश्र एवं लखनऊ के पंडित अजय जी महाराज के मार्गदर्शन में बिंदु सत्संग मंडल तथा श्याम मित्र मंडल भाटापारा द्वारा संपन्न कराया जाएगा। रामराज्याभिषेक के पश्चात श्री राम दरबार की आरती की जाएगी और श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण होगा।
शाम 7 बजे पुनः मुख्य दरबार की आरती होगी। इसके बाद रात 8 बजे से ग्वालियर से आ रहे प्रसिद्ध भजन प्रवाहक श्री मनोज शर्मा ‘पागल’ द्वारा भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी। भजन कार्यक्रम प्रभु इच्छा तक जारी रहेगा। आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु भजनों का आनंद ले सकेंगे।
छत्तीसगढ़ का पहला श्री महासती मंदिर होने का गौरव
श्री महासती मंदिर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक पहचान भी विशेष है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार सती मंदिरों की परंपरा में श्री महासती मंदिर छत्तीसगढ़ का सर्वप्रथम मंदिर माना जाता है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में तीन देवियां क्रमशः श्री महालक्ष्मी जी, श्री महासती जी एवं श्री महादुर्गा जी विराजमान हैं। इसके अलावा मंदिर के परिक्रमा मार्ग में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना एवं दर्शन करते हैं।
मंदिर की एक अन्य विशेषता यहां प्रज्ज्वलित अखंड ज्योतियां हैं। मंदिर में कुल सात अखंड ज्योत निरंतर प्रज्ज्वलित रहती हैं। इनमें दो अखंड ज्योत मुख्य गर्भगृह में, एक श्री हनुमान जी के मंदिर में तथा चार अखंड ज्योत श्री शिव जी के मंदिर में प्रज्ज्वलित हैं। श्रद्धालुओं के लिए ये अखंड ज्योतियां विशेष आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं।
स्थापना काल से चित्रकूट के पंडित परिवार की सेवा
श्री महासती मंदिर की पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं में चित्रकूट के पंडित परिवार का भी लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मंदिर स्थापना के समय से ही चित्रकूट निवासी पंडित रामपाल जी त्रिपाठी अपनी सेवाएं देते रहे। उनके निधन के बाद उनके पुत्र पंडित उमाकांत जी वर्तमान में मंदिर में अपनी धार्मिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन एवं श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। आयोजकों ने नगर एवं आसपास के क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से वार्षिकोत्सव में शामिल होकर माता रानी के दर्शन, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ लेने की अपील की है। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिलेगा।



