RO.NO. 01
ज्योतिषि

आज महानवमी और दशहरा का पर्व: मां दुर्गा की विदाई और शस्त्र पूजा के लिए जानें शुभ मुहूर्त

Ro no 03

Mahanavami 2026 : आज 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया था। वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की थी। इस दिन शस्त्र पूजन, शमी पूजन और दुर्गा विसर्जन का विशेष महत्व माना जाता है।

इस वर्ष 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयदशमी का संयोग बताया गया है। ऐसे में श्रद्धालु पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आज का पंचांग

  • तिथि: शुक्ल पक्ष नवमी दोपहर 12:50 बजे तक, इसके बाद दशमी तिथि।
  • योग: शूल, अगले दिन 21 अक्टूबर को तड़के 12:50 बजे तक; इसके बाद गण्ड योग।
  • करण: कौलव दोपहर 12:50 बजे तक, फिर तैतिल करण अगले दिन तड़के 1:36 बजे तक।
  • सूर्योदय: सुबह 6:25 बजे।
  • सूर्यास्त: शाम 5:47 बजे।
  • चंद्रोदय: दोपहर 2:23 बजे।
  • चंद्रास्त: 21 अक्टूबर को तड़के 1:22 बजे।

आज के शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक।
  • अमृत काल: सुबह 6:36 बजे से 8:21 बजे तक।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक।
  • दुर्गा विसर्जन मुहूर्त: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक।
  • विजयदशमी पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक।

दुर्गा विसर्जन के लिए बताया गया शुभ समय कुल 2 घंटे 16 मिनट का है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशमी तिथि के दौरान दुर्गा विसर्जन का विशेष महत्व होता है। श्रवण नक्षत्र और दशमी तिथि का दोपहर में संयोग होने पर इस समय को प्राथमिकता दी जाती है।

आज के अशुभ समय

  • राहुकाल: दोपहर 2:56 बजे से शाम 4:21 बजे तक।
  • गुलिकाल: दोपहर 12:06 बजे से 1:31 बजे तक।
  • यमगण्ड: सुबह 9:15 बजे से 10:40 बजे तक।

आज का नक्षत्र और राशियां

आज चंद्रदेव श्रवण नक्षत्र में शाम 6:02 बजे तक रहेंगे। इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रदेव और इसके देवता भगवान विष्णु माने जाते हैं। इसका प्रतीक कान है। इस नक्षत्र को ज्ञान, सीखने की क्षमता और सुनने की कला से जोड़ा जाता है।

आज सूर्यदेव तुला राशि और चंद्रदेव मकर राशि में स्थित रहेंगे।

दशहरा का धार्मिक महत्व

विजयदशमी को विजय, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। इस दिन कई स्थानों पर रावण दहन, शस्त्र पूजन और शमी पूजन किया जाता है।

दशहरा का संदेश है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने वाले व्यक्ति की अंततः विजय होती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को दशहरा, दसरा और नेपाल में दशैं के नाम से मनाया जाता है।

Share this

Kailash Jaiswal

"BBN24 News - ताजा खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत! पढ़ें छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया की ब्रेकिंग न्यूज, राजनीति, खेल, व्यवसाय, मनोरंजन और अन्य अपडेट सबसे पहले।"

Related Articles

Back to top button