प्याज की महंगाई से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद, जल्द काबू में आ सकते हैं दाम

नई दिल्ली। त्योहारों के बीच प्याज की ऊंची कीमतों ने आम लोगों के रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। हालांकि, आने वाले कुछ हफ्तों में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। खरीफ प्याज की नई फसल मंडियों में पहुंचने और पुराने स्टॉक की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है। वहीं, केंद्र सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री का दायरा बढ़ाकर 123 शहरों तक कर दिया है।
इसके बावजूद फिलहाल प्याज के खुदरा दाम पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने बने हुए हैं। ऐसे में लोगों को कीमतों में बड़ी गिरावट के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
एक साल में करीब दोगुने हुए प्याज के दाम
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 10 अक्टूबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 26.65 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर प्याज के औसत खुदरा भाव में करीब 99 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, 10 सितंबर को प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.10 रुपये प्रति किलो थी, जो 10 अक्टूबर को मामूली घटकर 52.99 रुपये रह गई। इससे साफ है कि एक महीने के दौरान खुदरा बाजार में कीमतों में खास राहत नहीं मिली है।
थोक बाजार में भी प्याज के भाव ऊंचे बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्याज की औसत थोक कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 123.3 प्रतिशत अधिक है।
महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से बढ़ेगी प्याज की आवक
प्याज की कीमतों में राहत की उम्मीद नई फसल की आवक बढ़ने से जुड़ी है। कारोबारियों के अनुसार, नवंबर तक मंडियों में प्याज की उपलब्धता में सुधार हो सकता है। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से नवंबर के अंत तक आपूर्ति जारी रहने की संभावना है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र में शुरुआती खरीफ प्याज की आवक अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। धीरे-धीरे आवक बढ़ने से बाजार में उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुराने प्याज का स्टॉक भी घरेलू मांग पूरी करने में मदद कर सकता है। वहीं, राजस्थान के अलवर से आपूर्ति बढ़ने पर उत्तर भारत के बाजारों को प्याज की उपलब्धता के लिए महाराष्ट्र पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है।
123 शहरों में बफर स्टॉक से प्याज बेच रही सरकार
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री तेज की है। सरकार के 7 अक्टूबर के बयान के अनुसार, रियायती दरों पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए बिक्री और वितरण का दायरा बढ़ाकर 123 शहरों तक किया गया है।
सरकार का उद्देश्य बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों में अनावश्यक उछाल को नियंत्रित करना है। इसके साथ ही परिवहन और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकारी अनुमान के मुताबिक, इस साल खरीफ प्याज की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक रह सकता है। यदि नई फसल की आवक अनुमान के मुताबिक बढ़ती है, तो आने वाले समय में बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति मिल सकती है।
कब तक सस्ता होगा प्याज?
प्याज की कीमतों में राहत मुख्य रूप से नई फसल की आवक, पुराने स्टॉक की उपलब्धता और सरकारी बफर स्टॉक से होने वाली बिक्री पर निर्भर करेगी। थोक बाजार में आपूर्ति बढ़ने का असर खुदरा दुकानों तक पहुंचने में समय लग सकता है।
ऐसे में आने वाले कुछ हफ्तों में प्याज की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है, लेकिन खुदरा भाव कितनी तेजी से घटेंगे, यह बाजार में वास्तविक आवक और मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन बड़ी गिरावट की पुष्टि होना अभी बाकी है।



