पहले FIR, अब SC/ST एक्ट की शिकायत: पत्रकार जयप्रकाश ने उठाए कार्रवाई और जाति प्रमाण पत्र पर सवाल

बालोद। ग्राम पंचायत भेड़ी लोहारा की शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकान में 29 जुलाई को हुए विवाद के बाद पत्रकार जयप्रकाश सिन्हा के खिलाफ दर्ज FIR अब नए विवाद का रूप लेती दिखाई दे रही है। मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों के बाद राशन दुकान संचालक चंद्रभान टेमरे ने खुद को अनुसूचित जाति का सदस्य बताते हुए SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जयप्रकाश सिन्हा ने इस पूरी कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए जाति प्रमाण पत्र और मामले की पृष्ठभूमि की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राशन दुकान में हुआ था विवाद
29 जुलाई 2026 को भेड़ी लोहारा की शासकीय उचित मूल्य की दुकान में जयप्रकाश सिन्हा और दुकान संचालक चंद्रभान टेमरे के बीच विवाद हुआ था। दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में शिकायत दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने 23 अगस्त को जयप्रकाश सिन्हा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296 और 351(3) के तहत FIR दर्ज की।
जयप्रकाश का कहना है कि घटना के दौरान उनके साथ भी मारपीट की गई थी और उन्होंने पुलिस के समक्ष अपनी शिकायत रखी थी, लेकिन उनके पक्ष पर उसी तरह कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर के रसूखदार लोगों के प्रभाव के कारण पूरे मामले में कार्रवाई का रुख उनके खिलाफ कर दिया गया।
SC/ST एक्ट की शिकायत ने बढ़ाया विवाद
मामले में चंद्रभान टेमरे की ओर से खुद को अनुसूचित जाति का सदस्य बताते हुए SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इसके जवाब में जयप्रकाश सिन्हा ने चंद्रभान टेमरे की जाति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जयप्रकाश की ओर से पेश दस्तावेजों में 2019-20 के एक निर्वाचन संबंधी मामले में एसडीएम न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला दिया गया है। उस आदेश में चंद्रभान टेमरे की जाति को अनुसूचित जाति के रूप में स्वीकार नहीं किया गया था।
जयप्रकाश का कहना है कि इस पुराने निर्वाचन मामले के आवेदक भूषण लाल बारले से उनकी मित्रता भी चंद्रभान टेमरे की नाराजगी का एक कारण रही है। उनका आरोप है कि इसी पुराने मामले को लेकर भी चंद्रभान उनके प्रति रंजिश रखते थे।
यही दस्तावेज अब पूरे मामले में महत्वपूर्ण हो गए हैं।
जयप्रकाश का कहना है कि यदि पूर्व के प्रशासनिक आदेश में उनकी जाति को अनुसूचित जाति नहीं माना गया था, तो वर्तमान में प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र की वैधता, जारी होने की प्रक्रिया और उसके आधार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
CCTV फुटेज को लेकर भी जयप्रकाश ने उठाए सवाल
मामले में सामने आए राशन दुकान के CCTV फुटेज को लेकर भी जयप्रकाश सिन्हा ने सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि चंद्रभान टेमरे ने पुलिस को दिए अपने बयान/शिकायत में जिन पांच लोगों को घटना का गवाह बताया है, उनमें से चार लोग CCTV फुटेज में घटनास्थल पर नजर नहीं आते। जयप्रकाश का कहना है कि इससे यह सवाल उठता है कि जिन लोगों को प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया गया है, वे वास्तव में घटना के समय मौके पर मौजूद थे या नहीं।
जयप्रकाश ने मुख्य गवाह बताए जा रहे सेवकराम सिन्हा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सेवकराम की पत्नी भुनेश्वरी सिन्हा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और वर्ष 2024 में जयप्रकाश सिन्हा के परिवार के एक बच्चे नैतिक सिन्हा की मौत के मामले को उन्होंने पत्रकार और परिवार के सदस्य के रूप में प्रमुखता से उठाया था। जयप्रकाश के अनुसार, उस मामले में भुनेश्वरी सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई हुई और वे निलंबित भी हुई थीं। इसी पुराने घटनाक्रम के कारण जयप्रकाश का दावा है कि सेवकराम सिन्हा भी उनसे व्यक्तिगत रंजिश रखते हैं।
जयप्रकाश का आरोप—राशन दुकान की शिकायतों के कारण बनाया जा रहा निशाना
पत्रकार जयप्रकाश सिन्हा का कहना है कि इस विवाद की असली पृष्ठभूमि राशन दुकान में कथित अनियमितताओं के खिलाफ उनके द्वारा लगातार की जा रही शिकायतें हैं। उनके मुताबिक, वे पूर्व में भी राशन दुकान से संबंधित शिकायतें सीएम हेल्पलाइन और प्रशासन के समक्ष करते रहे हैं। उनका आरोप है कि राशन दुकान की अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाने के कारण दुकान संचालक उनसे नाराज था और इसी रंजिश के चलते 29 जुलाई की सामान्य कहासुनी को बाद में गंभीर रूप दिया गया।
जयप्रकाश ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विवाद जाति को लेकर नहीं था और उन्होंने किसी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उनका आरोप है कि अब पुराने विवाद को SC/ST एक्ट के तहत मामला बनाने की दिशा में ले जाया जा रहा है।



