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अंतर्राष्ट्रीय

होर्मुज जलडमरूमध्य पर राहत, 300 अरब डॉलर पैकेज के साथ यूएस-ईरान डील चर्चा में

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 14 सूत्रीय इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को स्थायी रूप देना, क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना और होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को फिर से सुचारू करना है।

समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने, उसके फ्रीज किए गए फंड और संपत्तियों को जारी करने तथा आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की निवेश योजना तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही ईरान को वैश्विक बाजार में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी मिल जाएगी।

समझौते के अनुसार दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई, धमकी या बल प्रयोग से दूर रहने तथा एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए वार्ता जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की है।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाने का फैसला किया है, जबकि ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही तत्काल प्रभाव से शुरू होगी और तकनीकी तथा सुरक्षा बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।

समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु ऊर्जा संबंधी जरूरतों पर आगे भी बातचीत जारी रखेंगे। अंतिम समझौते में परमाणु सहयोग का एक विस्तृत ढांचा शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा अमेरिका ने ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़ी बैंकिंग, बीमा तथा परिवहन सेवाओं पर लगी बाधाओं में छूट देने का भी वादा किया है। साथ ही ईरान की रोकी गई संपत्तियों और फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की प्रक्रिया भी तय की जाएगी।

समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए दोनों देशों के बीच एक विशेष कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दिलाने का भी प्रावधान रखा गया है।

इस समझौते को पश्चिम एशिया में शांति, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि सभी शर्तें सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो यह वर्षों से चले आ रहे अमेरिका-ईरान विवाद के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है।

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Kailash Jaiswal

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