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ईरान-अमेरिका 14 सूत्रीय डील! होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले तेहरान को मिल सकते हैं 300 अरब डॉलर

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते का मसौदा सामने आया है, जिसमें युद्धविराम से लेकर परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को खोलने तक कई अहम बिंदु शामिल हैं।

समझौते के अनुसार ईरान तत्काल होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए कदम उठाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा दबाव कम हो सकेगा। इसके बदले अमेरिका ईरान को बिना रोक-टोक तेल निर्यात की अनुमति देगा। साथ ही युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए ईरान को कम से कम 300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उसे हासिल करने की कोशिश करेगा। वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि अंतिम परमाणु समझौता होने के बाद ईरान पर लगाए गए अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में काम किया जाएगा। ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा है कि जल्द ही दोनों देशों के राष्ट्रपति इस पर औपचारिक हस्ताक्षर कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार को इस समझौते पर सहमति बनी और ई-हस्ताक्षर किए गए। इस दस्तावेज को “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” नाम दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह समझौता 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद सामने आया है, जिसका उद्देश्य तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। सात अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू हुआ था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को तेल निर्यात की स्वतंत्रता और प्रतिबंधों में राहत जैसी रियायतें 2015 के परमाणु समझौते की तुलना में कहीं अधिक बड़ी हैं। ऐसे में अमेरिका के भीतर इस समझौते की आलोचना होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी इसे एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

समझौते की प्रमुख बातें

  • अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी सैन्य अभियान तत्काल प्रभाव से बंद होंगे।
  • दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।
  • किसी भी पक्ष द्वारा दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
  • अंतिम व्यापक समझौते के लिए 60 दिनों तक विस्तृत वार्ता जारी रहेगी, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।
  • ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उसके विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।
  • अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगाए गए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में काम करने का आश्वासन दिया है।
  • होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करने के लिए ईरान आवश्यक कदम उठाएगा।
  • युद्ध के बाद ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया जाएगा।
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Kailash Jaiswal

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