अमेरिका-ईरान डील का असर: तेल से महंगाई तक, भारत को मिल सकते हैं कई बड़े फायदे

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं। दोनों देशों के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और व्यापारिक गतिविधियां बहाल करने का प्रावधान शामिल है। इस घटनाक्रम को भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल पर निर्भर करता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर उपयोग होने वाले कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात भी इसी रास्ते से होता है, जो भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता हैं।
फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण इस मार्ग से तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। अब समझौते और तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
तेल की कीमतों में आई नरमी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री खोलने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 4 प्रतिशत घटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
युद्ध और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते फरवरी में जहां कच्चे तेल की कीमतें 70-72 डॉलर प्रति बैरल थीं, वहीं बाद में बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
पेट्रोल-डीजल और CNG कीमतों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आपूर्ति सामान्य होने से भारत में पेट्रोल, डीजल और CNG की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे आने वाले समय में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
हालांकि बढ़ी हुई लागत के बावजूद सरकार ने मई के मध्य तक खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे पहले 27 मार्च को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
चुनाव के बाद बढ़ी थीं ईंधन कीमतें
विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं CNG के दाम 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भी दो चरणों में कुल 89 रुपये की वृद्धि हुई थी।
तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में खुदरा कीमतें लागत से कम होने के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन करीब 650 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है, तो तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौता न केवल वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर करेगा, बल्कि भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए महंगाई और ऊर्जा लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



