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छत्तीसगढ़भाटापारा

बलौदाबाजार-भाटापारा में भर्ती घोटाला उजागर: नियमों की धज्जियां उड़ाकर हुई नियुक्तियां, RTI में खुली पूरी पोल

भाटापारा। जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आए दस्तावेजों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की गईं, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के साथ खुला अन्याय हुआ।

जानकारी के मुताबिक, 13 सितंबर 2023 को वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए संविदा भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था और 6 अक्टूबर 2023 को प्रावीण्य सूची जारी कर दी गई। सूची जारी होते ही चयन प्रक्रिया विवादों में घिर गई और बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने लगीं। बढ़ते विवाद को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी ने जांच के आदेश दिए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने जांच की। समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रावीण्य सूची में कई जगह काट-छांट और हेरफेर के संकेत मिले, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल और गहरे हो गए।

सबसे गंभीर मामला सहायक शिक्षक भर्ती में सामने आया, जहां पद के लिए डी.एड/डी.एल.एड अनिवार्य होने के बावजूद बी.एड अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई। इसे न केवल भर्ती नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की भी अनदेखी बताया जा रहा है।

वहीं हिंदी और संस्कृत व्याख्याता पदों पर भी पात्रता नियमों को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगे हैं। निर्धारित योग्यता के अनुसार 12वीं और स्नातक स्तर पर संबंधित विषय आवश्यक था, लेकिन आरोप है कि संस्कृत व्याख्याता पद पर केवल स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों का चयन कर विज्ञापन की शर्तों को दरकिनार किया गया।

जांच रिपोर्ट में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी राकेश शर्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन पर भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं को नजरअंदाज करने और जवाबदेही से बचने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इतने बड़े खुलासे के बावजूद अब तक विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

RTI आवेदक और पूर्व व्याख्याता सोमेश्वर राव ने मीडिया से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत, उच्च स्तरीय जांच और रिपोर्ट आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को नियमों के तहत नौकरी मिलनी चाहिए थी, वे आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि कथित अनियमित भर्ती से चयनित लोग लाभ उठा रहे हैं।

हर जांच में ‘लिपिकीय त्रुटि’ का बहाना!
इस पूरे मामले में बार-बार “लिपिकीय त्रुटि” का हवाला देकर जिम्मेदारी छोटे कर्मचारियों पर डालने की कोशिश भी सवालों के घेरे में है। अब चर्चा इस बात की है कि आखिर हर बड़ी गड़बड़ी में लिपिकीय त्रुटि कैसे निकल आती है? क्या यह महज संयोग है या जिम्मेदार अधिकारी खुद को बचाने का हथियार बना चुके हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भर्ती घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

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Kailash Jaiswal

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