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छत्तीसगढ़

6 मई जन्मदिवस विशेष जनसेवा न्याय और विकास की त्रिवेणी पं. बंशराज तिवारी…

बलौदाबाजार  : बलौदाबाजार पं. बंशराज तिवारी छत्तीसगढ की राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चेतना के सशक्त स्तंभ थे।एक कुशल अधिवक्ता, सिद्धांतनिष्ठ विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समर्पित समाजसेवी के रूप मे उन्होेंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व से जनसेवा की एक नई परिभाषा गढ़ी। उनका जीवन उन विरले महानायकों मे से एक था,जिन्होंने सत्ता को साधन बनाया लक्ष्य नही, अपने बनाए सिद्धांतों से कभी समझौता नही किया और अटूट समर्पण से क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा दी।

6 मई 1925 को पटेल सेनिटेशन पंचायत के अध्यक्ष पं. महावीर प्रसाद तिवारी के पुत्र के रूप मे जन्मे बंशराज तिवारी 3 बहनों मे इकलौते भाई थे। बाल्यावस्था मे ही पिता के निधन से उनके कंधों पर जिम्मेदारियां और चुनौतियां आईं जिनका सामना करते हुए उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण की।

अल्पायु मे ही वे पटेल के पद पर आसीन हुए और 1940 मे ही उस पद से त्यागपत्र दे कर स्वतंत्रता
आंदोलन मे कूद पड़े। 1946 मे समाजवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़कर उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की और साथ ही अपनी पढ़ाई जारी रखी।

एक अधिवक्ता के रूप मे न्याय को विधिक दायरे मे सीमित ना रखते हुए उन्होने मानवीय संवेदना और नैतिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ा। वकालत उनके लिए पेशा नही बल्कि वंचित शोषित निर्धन और जरूरतमंद को न्याय दिलाने का पवित्र माध्यम बना। बलौदाबाजार बार एसोसिएशन के सचिव पद पर रहते हुए उन्होंने प्रभावशाली ढंग से बलौदाबाजार को जिला बनाने और छत्तीसगढ को पृथक राज्य का दर्जा देने की मांग विभिन्न मंचों और प्रदर्शनों के माध्यम से सरकारों के समक्ष रखी और वे जीवनपर्यंत इसके लिए संघर्षरत रहे।

जब देश पर आपातकाल का अंधकार छाया और लोकतांत्रिक मूल्यों पर संकट आया तो बंशराज जी ने साहस, सत्य और स्वतंत्रता के पक्ष मे खड़े होने का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। भय और दमन के आगे झूकने के बजाए उन्होने अपने साथियों के साथ सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र की रक्षा का बिगुल फूंका। राजद्रोह जैसे गंभीर आरोपों का सामना करते हुए वे रायपुर सेंट्रल जेल मे मधु लिमय और जार्ज फर्नांडिस जैसे राष्ट्रीय नेताओं के साथ कारावास का दंश झेला। जिसके बाद वे प्रखर वक्ता और जननेता के रूप मे उभरे।

सन 1977 मे जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर वे बलौदाबाजार के विधायक निर्वाचित हुए। वे केवल एक जनप्रतिनिधि नही अपितु जनता के विश्वास और आकांक्षाओं के सशक्त स्वर बनकर उभरे। विधानसभा मे मुख्य सचेतक की भूमिका मे रहते हुए उन्होने बलौदाबाजार विधानसभा मे विकास की नई इबारत लिखी

।शिवनाथ नदी से बलौदाबाजार तक जल प्रदाय योजना के तहत स्वच्छ जल अतिरिक्त सत्र न्यायालय की स्थापना निजी महाविद्यालय का शासकीयकरण टेलीफोन एक्सचेंज डाकघर की स्थापना शासकीय अस्पताल का विस्तार शहर से लेकर गांवों तक स्वास्थ्य शिक्षा पेयजल सड़कों पूल पूलियों की व्यवस्था अपने ढाई साल के छोटे से कार्यकाल मे उन्होनें अपनी दूरदर्शिता कर्मठता और समर्पण से विकासपुरूष का दर्जा प्राप्त किया।

पारिवारिक जीवन मे भी अपने उच्च आदर्शों का परिचय देते हुए उन्होंने अपनी पत्नि चंदा देवी के साथ मिलकर पुत्रों पुत्री मे समाज के लिए सेवा समर्पण त्याग का जो दीप प्रज्वलित किया वो आज भी प्रदीप्तमान है।9 फरवरी 2006 उनके निधन के पश्चात परिवार द्वारा लगातार 20 वर्षों से निःशुल्क रोग निदान शिविर के माध्यम से हजारों मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

उनकी स्मृति को अनंतकाल तक जीवंत रखने के लिए बलौदाबाजार के विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्य मार्ग चौड़ीकरण मे भूमि दान की गई राष्ट्र प्रेम की अलख जलती रहे उसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय के लिए भूमि का दान किया गया।उनका संपूर्ण जीवन मानवता को समर्पित रहा। पं. बंशराज तिवारी ने वकालत और सत्ता को जनसेवा और विकास का माध्यम बनाया। वे एक सच्चे जननेता के रूप मे याद किए जाते रहेंगे।

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Kailash Jaiswal

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