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एंटी-बैक्टीरियल ताकत का खजाना: नीम और तुलसी कैसे सूजन व संक्रमण से करते हैं बचाव, विशेषज्ञों से समझें पूरी जानकारी

Ayurvedic Remedies  : बदलते मौसम, प्रदूषण और अनियमित जीवनशैली का सीधा असर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। ऐसे में आयुर्वेद में वर्णित कुछ पारंपरिक जड़ी-बूटियां शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में सहायक मानी जाती हैं। इनमें नीम और तुलसी का विशेष स्थान है। इन्हें केवल धार्मिक या पारंपरिक पौधे नहीं, बल्कि प्राकृतिक औषधि के रूप में भी देखा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इन दोनों पत्तियों में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो संक्रमण से लड़ने, सूजन कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं।

नीम: प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर

नीम (Azadirachta indica) को आयुर्वेद में कड़वे लेकिन प्रभावी औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है। इसके पत्तों में एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

  • दांत और मसूड़ों की सेहत के लिए लाभकारी
  • त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी
  • शरीर में सूजन कम करने में सहायक
  • ब्लड शुगर संतुलन में मददगार

एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर

कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि नीम में मौजूद सक्रिय तत्व कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि किसी गंभीर रोग में इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

तुलसी: तनाव और संक्रमण से बचाव में सहायक

तुलसी (Ocimum sanctum), जिसे होली बेसिल भी कहा जाता है, आयुर्वेद में ‘हर्ब्स की रानी’ मानी जाती है। इसमें यूजेनॉल, फ्लेवोनोइड्स और अन्य जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं।

इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक

  • सर्दी, खांसी और गले की खराश में लाभकारी
  • मानसिक तनाव कम करने में मददगार
  • सांस संबंधी समस्याओं में उपयोगी
  • एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से युक्त

तुलसी को एक प्राकृतिक एडाप्टोजेन भी माना जाता है, जो शरीर को तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करता है।

साथ में सेवन के संभावित लाभ

आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार नीम और तुलसी का संतुलित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। ये संक्रमण से बचाव, सूजन में कमी और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।

सेवन का तरीका

  • नीम की कोमल पत्तियां सीमित मात्रा में चबाई जा सकती हैं।
  • नीम का रस या पाउडर भी उपयोग किया जाता है।
  • तुलसी की पत्तियां सीधे चबाई जा सकती हैं या पानी/चाय में मिलाकर ली जा सकती हैं।

जरूरी सावधानी

किसी भी औषधीय पौधे का नियमित सेवन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है, विशेषकर यदि आप डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार के उपचार या औषधीय उपयोग से पहले योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

 

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Kailash Jaiswal

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