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इम्युनिटी पर बड़ा खुलासा—उम्र ही नहीं, बर्थप्लेस और जेंडर भी हैं जिम्मेदार

नई दिल्ली: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर एक अहम अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। शोध में पाया गया है कि किसी वायरस के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया सभी लोगों में एक जैसी नहीं होती। उम्र बढ़ने के साथ-साथ एंटीबॉडी बनने का पैटर्न बदलता है, लेकिन यह बदलाव सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करता।

Nature Immunology में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, जब कोई वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र उसके विशिष्ट हिस्सों को पहचानकर एंटीबॉडी तैयार करता है। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग लोगों में वही वायरस भिन्न प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। यानी हर व्यक्ति का इम्यून सिस्टम वायरस के अलग हिस्से को प्राथमिकता देकर उसे निष्क्रिय करने की कोशिश कर सकता है।

फ्रांस के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में करीब 1,000 स्वस्थ प्रतिभागियों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ प्रकार की एंटीबॉडी उम्र बढ़ने के साथ अधिक बनने लगती हैं, जबकि कुछ की संख्या घट जाती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि एंटीबॉडी वायरस के किस “एपिटोप” यानी विशेष हिस्से को निशाना बना रही है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि लिंग (जेंडर), आनुवंशिक बनावट और जन्मस्थान जैसे कारक भी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के तौर पर, अलग भौगोलिक क्षेत्रों में पले-बढ़े लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में अंतर देखा गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्यावरण, पोषण, संक्रमण के पूर्व अनुभव और जीवनशैली जैसे तत्व भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इन निष्कर्षों से भविष्य में वैक्सीन विकास और व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यदि यह समझ लिया जाए कि अलग-अलग समूहों में एंटीबॉडी किस तरह बनती हैं, तो टीकों और उपचारों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

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Kailash Jaiswal

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