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पीले वस्त्र, वीणा की धुन और श्रद्धा: भारत में कैसे मनाई जाती है बसंत पंचमी

Saraswati Jayanti 2026 :भारत में बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ऋतुओं के बदलाव, ज्ञान की आराधना और सांस्कृतिक उत्सव का संगम है। यह दिन प्रकृति में नई कोपलों, पीले रंग की आभा और मन में रचनात्मक ऊर्जा का संचार करता है। मान्यता है कि इसी शुभ तिथि पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन विशेष रूप से शिक्षा और ज्ञान से जुड़े अनुष्ठान किए जाते हैं।

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे ज्ञान, संगीत, कला, सृजन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।

पूर्वी भारत में विद्या की आराधना

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में बसंत पंचमी को अत्यंत भव्य रूप में मनाया जाता है। घरों, विद्यालयों और सार्वजनिक पंडालों में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा होती है। बंगाल में इस दिन “हाते खोड़ी” की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है। इसे विद्या आरंभ का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।

उत्तर भारत में फसलों और पतंगों का उत्सव

पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी का सीधा संबंध सरसों की फसल और पीले खेतों से जुड़ा है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और पतंग उड़ाकर उत्सव मनाते हैं। यह दिन किसानों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

तीर्थों पर स्नान और आरती

उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज में बसंत पंचमी पर गंगा घाटों पर विशेष आरती और स्नान का आयोजन होता है। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में इस दिन स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।

पश्चिम भारत में रंगीन आसमान

राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी पतंगबाजी के लिए प्रसिद्ध है। लोग पीले परिधान पहनते हैं, घरों को फूलों से सजाते हैं और नए मौसम का स्वागत करते हैं। यहां यह पर्व उल्लास और उमंग का प्रतीक बन जाता है।

दक्षिण भारत में विद्यारंभ की परंपरा

तेलंगाना के बासर स्थित विश्व प्रसिद्ध मां सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी पर अक्षर अभ्यासम का आयोजन होता है। इस अवसर पर बच्चों को पहली बार पढ़ने-लिखने की शुरुआत कराई जाती है और शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं का दान किया जाता है।

ज्ञान और सृजन का पर्व

देशभर में बसंत पंचमी के दिन विद्यालयों, महाविद्यालयों और घरों में मां सरस्वती की पूजा कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि ज्ञान, कला और संस्कृति ही समाज की असली शक्ति हैं।

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Kailash Jaiswal

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