भाटापारा में बलराम जयंती-किसान दिवस पर संगोष्ठी प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि पद्धति अपनाने पर जोर

भाटापारा :- कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा में भगवान् बलराम जयंती-किसान दिवस के अवसर पर “प्राकृतिक खेती, गौ कृषि वाणिज्यम एवं तिलहन उत्पादन” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जिले के विभिन्न ग्रामों से आए 100 से अधिक किसानों, कृषक महिलाओं, संगठनों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष रितेश साहू ने कहा कि भगवान् बलराम को कृषि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। आज उत्पादन लागत बढ़ने और मृदा उर्वरता घटने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित पद्धति ही समाधान है। उन्होंने किसानों से जैविक उपाय अपनाकर लागत घटाने और आय बढ़ाने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एच.एल. सोनबोईर ने की। उन्होंने कहा कि तिलहन उत्पादन देश की खाद्य तेल आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक और कीट-रोग प्रबंधन से प्रदेश को तिलहन उत्पादन में अग्रणी बनाया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि हेमसिंह चौहान, महामंत्री किसान मोर्चा ने गौ-आधारित खेती को भारतीय कृषि की नींव बताते हुए किसानों से नवाचार और संगठन पर बल दिया। वहीं डॉ. अंगद सिंह राजपूत, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र ने कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य सुधरता है और लागत घटती है। उन्होंने जीवामृत और घनजीवामृत को किसानों के लिए लाभकारी बताया।
आभा पाठक, सहायक संचालक उद्यानिकी ने कहा कि बहुफसली प्रणाली और फल-सब्जी उत्पादन को जोड़कर किसान आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। दीपक नायक, उप संचालक कृषि ने तिलहन प्रोत्साहन योजनाओं और समर्थन मूल्य नीति की जानकारी दी।
इस अवसर पर किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और कहा कि यदि प्रशिक्षण और बाज़ार की सुविधाएँ मिलें तो वे रसायन आधारित खेती से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने को तैयार हैं।
संगोष्ठी का संचालन डॉ. प्रदीप कश्यप ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पी.डी. वर्मा ने प्रस्तुत किया।
यह कार्यक्रम किसानों के बीच आत्मनिर्भर, टिकाऊ और लागत-कटौती आधारित कृषि पद्धति के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।