AIIMS स्टडी: अस्पतालों में इलाज के दौरान लगाई जाने वाली नली से बढ़ रहा ब्लड इंफेक्शन का खतरा

नई दिल्ली। अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के दौरान लगाई जाने वाली कैथेटर नली अब सेहत के लिए खतरा साबित हो रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक नई स्टडी में सामने आया है कि कैथेटर के जरिए मरीजों में खून का गंभीर संक्रमण फैल रहा है, जिसे मेडिकल भाषा में सेंट्रल लाइन-एसोसिएटेड ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन्स (CLABSI) कहा जाता है।
क्या है कैथेटर और कैसे फैलता है संक्रमण?
कैथेटर बेहद पतली नली होती है, जिसे मरीजों की नसों या शरीर के किसी हिस्से में लगाया जाता है। इसका उपयोग दवा देने, खून निकालने, पेशाब बाहर निकालने या तरल पोषण पहुंचाने के लिए किया जाता है। लेकिन एम्स के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि यही नली अस्पताल के वातावरण में मौजूद कीटाणुओं को सीधे खून में पहुंचा देती है। कई बार ये कीटाणु इतने शक्तिशाली होते हैं कि सामान्य एंटीबायोटिक्स भी बेअसर हो जाते हैं।
देशभर से इकट्ठा हुआ डाटा
इस रिसर्च को द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें देशभर के 54 अस्पतालों की 200 आईसीयू यूनिट्स से 2017 से 2024 तक का डाटा इकट्ठा किया गया। नतीजे चौंकाने वाले हैं—8,629 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई और हर 1,000 सेंट्रल लाइन-डे पर औसतन 8.83 मरीजों को इंफेक्शन हुआ। सबसे ज्यादा मामले कोविड-19 महामारी के दौरान 2020-21 में सामने आए, जब अस्पतालों पर मरीजों का दबाव और स्टाफ की कमी सबसे अधिक थी।
लापरवाही बनी बड़ी वजह
स्टडी में यह भी पाया गया कि संक्रमण के पीछे मुख्य कारण ICU में मरीजों की अधिक संख्या, सफाई में लापरवाही और कैथेटर लगाने व संभालने में जरूरी सावधानियों की कमी रही। इससे न सिर्फ मरीजों का अस्पताल में रहने का समय बढ़ जाता है बल्कि इलाज का खर्च भी कई गुना बढ़ जाता है।
बचाव ही समाधान
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से बचने के लिए कैथेटर का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए। साथ ही अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम के कड़े नियम लागू हों और स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। तभी मरीजों को इस घातक ब्लड इंफेक्शन से सुरक्षित रखा जा सकता है।