
भाटापारा: जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने गुरुवार को भाटापारा तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कामकाज में लापरवाही और शिकायतों के निराकरण में हो रही देरी पर कलेक्टर का सख्त रुख देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि आम जनता के कामों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान कई फरियादी अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे। फरियादियों ने बताया कि आवेदन देने के बावजूद उनके प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें बार-बार केवल पेशी की तारीख दी जा रही है। एक फरियादी ने कलेक्टर को आवेदन दिखाते हुए कहा कि वह लंबे समय से कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उसका काम नहीं हुआ।
इस दौरान मौजूद नायब तहसीलदार ने कहा कि फरियादी काफी समय से कार्यालय नहीं आया है। इस पर फरियादी ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि वह नियमित रूप से कार्यालय पहुंच रहा है। मामला सुनते ही कलेक्टर ने संबंधित प्रकरण की नोटशीट तुरंत मंगाने के निर्देश दिए और पूछा कि अब तक इस पर क्या कार्रवाई हुई है।
काफी देर तक नोटशीट प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराज़गी जताते हुए कहा, “नोटशीट लाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?” उन्होंने निर्देश दिया कि जब तक वे नगर पालिका का निरीक्षण कर लौटें, तब तक संबंधित प्रकरण की नोटशीट उनके सामने प्रस्तुत की जाए।
इसके बाद कलेक्टर भाटापारा नगर पालिका पहुंचे, जहां नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। कलेक्टर ने नगर पालिका कार्यालय की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए विभिन्न विभागीय कार्यों की जानकारी भी ली।
मीडिया से चर्चा के दौरान कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और किसी भी हितग्राही को योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने स्वीकार किया कि भाटापारा तहसील कार्यालय में डायवर्सन, सीमांकन और शिकायतों के निराकरण में समय सीमा से अधिक देरी हो रही है, जिसे जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
भाटापारा में बस स्टैंड की समस्या को लेकर पूछे गए सवाल पर कलेक्टर ने कहा कि जमीन की उपलब्धता की समीक्षा कर इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे। वहीं सिविल अस्पताल को रिफर सेंटर के रूप में पहचाने जाने और महिला चिकित्सक की कमी के सवाल पर उन्होंने बताया कि सीएमएचओ को मरीजों की संख्या, इलाज और रिफर के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थिति की समीक्षा कर उचित निर्णय लिया जा सके।
इसके अलावा भाटापारा में कई अधिकारी-कर्मचारियों के ट्रेन से आना-जाना करने और मुख्यालय में समय पर उपलब्ध नहीं रहने के सवाल पर कलेक्टर ने एसडीएम को ऐसे कर्मचारियों की सूची तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए।कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण और सख्त रुख के बाद तहसील कार्यालय सहित प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति देखी गई। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद भाटापारा की प्रशासनिक व्यवस्था में कितना सुधार हो पाता है।




