भारतीय फास्ट-फूड बाजार में बड़ा उलटफेर, KFC–पिज्जा हट की पैरेंट कंपनियों का मेगा मर्जर

नई दिल्ली : भारतीय फास्ट-फूड इंडस्ट्री में बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। KFC और पिज्जा हट जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के पीछे खड़ी कंपनियां अब एक साथ आने वाली हैं। सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड में विलय की घोषणा से क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में हलचल मच गई है। इस मेगा मर्जर से न सिर्फ इंडस्ट्री का समीकरण बदलेगा, बल्कि McDonald’s और Domino’s जैसे दिग्गज ब्रांड्स की प्रतिस्पर्धा भी कड़ी हो जाएगी।
KFC-पिज्जा हट की ऑपरेटर कंपनियों का बड़ा फैसला
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, KFC और पिज्जा हट की ऑपरेटर सैफायर फूड्स अब देवयानी इंटरनेशनल में मर्ज होगी। देवयानी पहले से ही भारत में कई बड़े QSR ब्रांड्स का संचालन करती है। इस डील के तहत सैफायर के हर 100 शेयरों के बदले देवयानी 177 शेयर जारी करेगी। मर्जर के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी को दूसरे पूरे साल से सालाना 210 से 225 करोड़ रुपये तक की सिनर्जी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों जरूरी हो गया यह मर्जर?
भारत में फास्ट-फूड सेक्टर इस समय दबाव के दौर से गुजर रहा है। महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के चलते लोग बाहर खाने और ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर खर्च कम कर रहे हैं। इसका सीधा असर रेस्टोरेंट कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर पड़ा है। सितंबर तिमाही में सैफायर और देवयानी—दोनों कंपनियों ने बढ़ती लागत और नुकसान की रिपोर्ट दी है। ऐसे में खर्च घटाने, ऑपरेशनल स्केल बढ़ाने और मुनाफे में सुधार के लिए यह मर्जर अहम माना जा रहा है।
McDonald’s और Domino’s की क्यों बढ़ेगी मुश्किल?
मर्जर पूरा होने के बाद देवयानी इंटरनेशनल भारत की सबसे बड़ी QSR ऑपरेटर कंपनियों में शामिल हो जाएगी। KFC और पिज्जा हट के पूरे भारतीय फ्रेंचाइजी राइट्स एक ही कंपनी के पास होंगे। इसके अलावा, श्रीलंका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की पकड़ मजबूत होगी। इससे McDonald’s (Westlife Foodworld) और Domino’s (Jubilant FoodWorks) पर प्रतिस्पर्धी दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
मंजूरी की प्रक्रिया में लगेगा समय
हालांकि, यह डील तुरंत प्रभावी नहीं होगी। इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), NCLT, शेयरधारकों और कर्जदाताओं की मंजूरी जरूरी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 12 से 15 महीने का समय लग सकता है। सभी मंजूरियां मिलने के बाद ही यह मर्जर लागू होगा।



