न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती: सरकार ने बढ़ाया बजट, ई-कोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट पर विशेष जोर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026 में न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास और अदालतों के डिजिटलीकरण के लिए 2,010 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग न्यायालयों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, ई-कोर्ट परियोजना के विस्तार तथा न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण पर किया जाएगा।
ई-कोर्ट परियोजना के लिए 1,200 करोड़ रुपये
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 810 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के लिए 1,200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे अदालतों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
मामलों के शीघ्र निपटारे में कई कारक अहम
कानून मंत्री ने कहा कि केवल बजट बढ़ाने से ही मामलों का तेजी से निपटारा संभव नहीं है। इसके लिए मामलों की जटिलता, जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों की उपलब्धता, न्यायालय की प्रक्रियाओं का समय पर पालन, पक्षकारों का सहयोग और वकीलों की प्रभावी पैरवी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को मिला विस्तार
सरकार ने बताया कि अक्टूबर 2019 में बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना शुरू की गई थी। इस योजना में पॉक्सो अधिनियम के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना भी शामिल है।
30 सितंबर 2026 तक बढ़ी योजना
पहले इस योजना का विस्तार 31 मार्च 2026 तक किया गया था, लेकिन अब इसे 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। योजना के तहत 790 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
देशभर में 775 फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित
उच्च न्यायालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित हो रही थीं। इनमें 398 विशेष ई-पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि न्यायिक बुनियादी ढांचे का विस्तार, अदालतों का डिजिटलीकरण और फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ने से आम नागरिकों को तेज, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।



