विधानसभा में गूंजा दवा खरीद का मुद्दा, यूनिक्योर कंपनी पर उठा सवाल, सरकार ने दी सफाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज दवा खरीद और गुणवत्ता को लेकर बड़ा मुद्दा गूंजा। विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य मंत्री से सवाल करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के अस्पतालों में कोटेड दवाइयों का विक्रय जारी है, जबकि अन्य राज्यों में इन्हें बैन किया जा चुका है। उन्होंने पूछा कि जब गुजरात में कुछ दवाइयों पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो छत्तीसगढ़ में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साथ ही ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीदे जाने पर भी सवाल उठाए।
अटल श्रीवास्तव ने विशेष रूप से गैस्ट्रो से संबंधित दवाइयों के फार्मूले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि दोनों दवाइयों के कंपोनेंट समान हैं, तो एक पर प्रतिबंध और दूसरी की खरीद कैसे जारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में रिजेक्ट की गई दवाइयां छत्तीसगढ़ में खपाई जा रही हैं।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि दोनों दवाइयां अलग-अलग हैं। उनका प्रोसेस भले अलग हो, लेकिन कुछ कंपोनेंट समान हो सकते हैं। मंत्री ने कहा कि जिस दवा को लेकर आपत्ति जताई गई थी, उसे बैन कर दिया गया है और राज्य में जो दवाइयां खरीदी गई हैं, वे प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आतीं।
इसी दौरान विधानसभा में यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की दवा खरीद का मामला भी उठा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुपस्थिति में अटल श्रीवास्तव ने एस्पिरिन दवा की खरीद पर सरकार से जवाब मांगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि गुजरात में यूनिक्योर कंपनी की कुछ एस्पिरिन दवाइयों को ब्लैकलिस्ट किया गया था। उन्होंने बताया कि 25 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) को इस संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी।
मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में ब्लैकलिस्टेड दवाइयों की खरीद नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए जो ऑर्डर जारी किया गया था, वह अलग श्रेणी की एस्पिरिन टैबलेट का था और गुजरात में प्रतिबंधित दवा से उसका कोई संबंध नहीं है।
हालांकि, एहतियात के तौर पर यूनिक्योर की एस्पिरिन 75 mg (अनकोटेड) के खरीद आदेश को रद्द कर दिया गया है और कंपनी के साथ दर अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता संबंधी सूचना मिलते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई की।
वहीं, विपक्ष ने दवा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार को घेरते हुए मामले की गहन जांच की मांग की। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।



