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बेबस परिवार से पुलिस की जोर-जबरदस्ती, इंसाफ देने के बजाय बल बुलाकर उठाया, रहम के लिए गिड़गिड़ाते रहे पीड़ित…

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बलौदाबाजार. अपने मकान के लिए तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठी पीड़ित महिला और उसकी तीन बेटियों के साथ ग्रामीणों को प्रशासन की टीम ने बल पूर्वक उठा दिया है. जब पीड़ितों ने उठने से मना किया तो पुलिस बल ने जबरदस्ती उठाने की कोशिश की. इस बीच अनशन पर बैठे ग्रामीणों और बल के बीच जमकर छीना झपटी हुई. सुस्त प्रशासन का कहना है कि, अनशनरत महिला को इलाज के लिए ले जाया गया है. वहीं पूरे मामले में प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी कहने से कतराते नजर आ रहे हैं. जो बहुत से सवाल भी खड़े कर रहा है.न्याय की मांग को लेकर प्रशासन के दरवाजा खटखटाते 1 साल हो गए पर प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम ही नहीं ले रही. प्रशासन के सुस्त रवैये को देखते हुए अब पीड़ित पक्ष अपनी मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गया था.

वहीं बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा ने जिला प्रशासन सहित कांग्रेसियों को आड़े हाथों लेकर पीड़ित पक्षों को न्याय दिलाने की बात कही है थी.बलौदाबाजार के अनुविभाग सिमगा अंतर्गत सुहेला में 1 साल पहले लोगों के घरों को तोड़कर बेघर कर दिया गया, जिससे पीड़ित पक्ष 1 वर्ष से लगातार अनुविभागीय अधिकारी और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाकर न्याय की गुहार लगा रहा है. लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा. जिससे आहत होकर अब पीड़ित अनिता वर्मा 3 दिनों से आमरण अनशन कर रही है. जिसकी वजह से उनकी हालत बिगड़ रही है पर प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है. वहीं इससे पीड़ित की तीन लड़कियां भी परेशान हैं.जानकारी के अनुसार, पीड़ित के घर को सुहेला सरपंच और उनके साथियों ने बलपूर्वक तोड़वा दिया था. जिसके बाद पीड़ित पक्ष को उस वक्त प्रेस कार्यालय में रहने दिया गया था. एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिला. वहीं इसके अलावा और भी पीड़ित हैं जो न्याय की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं.वहीं इस मामले में बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा ने जिला प्रशासन और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था. विधायक प्रमोद शर्मा ने कहा है था कि, जिला प्रशासन क्यों उनकी नहीं सुन रही है यह समझ से परे है. वहीं कांग्रेसी मौन हैं, यह और बड़ी बात है. गरीबों के हित की बात करने वाले सामने नहीं आ रहे हैं.