107 जानें गईं, SIR मामले पर बंगाल विधानसभा में ऐतिहासिक प्रस्ताव पास

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन – SIR) को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि राज्य में फैले भय और मानसिक दबाव के कारण अब तक 107 लोगों की जान जा चुकी है।
विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चल रही SIR प्रक्रिया ने आम नागरिकों में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। टीएमसी का आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग इसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जोड़कर देख रहे हैं और उन्हें डर है कि इस प्रक्रिया के जरिए उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं, जिससे उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न होने या नाम कटने की आशंका के चलते कई लोग मानसिक तनाव में आ गए, जिसके कारण आत्महत्या समेत कई दुखद घटनाएं सामने आईं। टीएमसी ने इन मौतों के लिए केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार इस प्रक्रिया का इस्तेमाल बंगाल के लोगों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी आयोग और केंद्र दोनों को लेनी चाहिए।
सियासी टकराव तेज
एसआईआर को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा है कि इस मुद्दे पर फैले भय के कारण रोजाना 3 से 4 लोगों की मौत हो रही है। उन्होंने इसे “पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की साजिश” करार दिया।
दूसरी ओर, विपक्षी भाजपा ने टीएमसी के सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार चुनाव से पहले जनता को गुमराह कर रही है और व्यक्तिगत दुखद घटनाओं को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है। हाल ही में ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में दलील रखने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बनीं।
क्या है SIR और क्यों हो रहा विरोध?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्वाचन आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना होता है। हालांकि बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर आशंका जताई जा रही है कि पुराने दस्तावेज न होने की स्थिति में लोगों को अवैध घोषित किया जा सकता है। असम में एनआरसी के दौरान सामने आए अनुभवों के कारण यह डर और गहराया है।
वहीं, निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर का मकसद केवल मतदाता सूची को सही करना है, न कि किसी भी नागरिक की नागरिकता पर सवाल उठाना।



