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छत्तीसगढ़

राज्य सरकार की नीति का असर, छत्तीसगढ़ में 52 माओवादी कैडरों ने अपनाया मुख्यधारा का मार्ग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई को एक और अहम उपलब्धि मिली है। हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य सरकार इसे शांति स्थापना और सामाजिक बदलाव की दिशा में मजबूत संकेत मान रही है।

करोड़ों के इनामी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी

आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादी कैडरों पर कुल मिलाकर लगभग 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सरकार के अनुसार हाल के दिनों में लगातार हो रहे आत्मसमर्पण यह दर्शाते हैं कि उग्रवाद की पकड़ कमजोर हो रही है और संगठन के भीतर भरोसे की कमी बढ़ रही है।

बस्तर में माओवादी ढांचे को लगा बड़ा झटका

प्रशासन का कहना है कि बस्तर अंचल में माओवादियों का नेटवर्क और स्थानीय समर्थन तेजी से टूट रहा है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, विकास कार्यों की गति और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में हालात बदल रहे हैं।

पुनर्वास नीति से बदली तस्वीर

राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को केवल कानूनी राहत ही नहीं, बल्कि पुनर्वास, रोजगार, प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ रही है। इसी वजह से कई माओवादी अब हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान को नई गति देगा। केंद्र और राज्य के समन्वय से चल रही रणनीति का असर जमीन पर दिखने लगा है और आने वाले समय में नक्सल गतिविधियों में और कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Kailash Jaiswal

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