छत्तीसगढ़

लचर कानून व्यवस्था के चलते बलौदा बाजार जिले में अपराधियों के हौसला बुलंद

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बलौदाबाजार जिले में लगातार बढ़ रही घटनाओं से आम आदमी दहशत में है। जिले में पुलिस आज जितनी बेबस और लाचार है उतनी कभी नहीं रही। हत्या, हत्या के प्रयास चोरी, तस्करी, नशाखोरी इस कदर जिले में बढ़ी हुई है कि आम लोगों का अब जीना दूभर हो गया है। चाकूबाजी की घटनाएं आम बात हो गई है। क्योंकि अपराधियों के मन से पुलिस का भय समाप्त हो चुका है इसके पीछे कहीं ना कहीं पुलिस का अपराधियों के प्रति वह नरम रवैया है जिसके कई अर्थ निकाले जा सकते हैं। ये हम नही कह रहे है आम जनता चीख चीख कर कह रही है झगड़े चोरी जैसी घटनाओं की प्रारंभिक रिपोर्ट लिखाने जब प्रार्थी थाने में पहुंचता है तो उसे घंटों बिठाया जाता है कई कई दिन तक जांच नहीं की जाती रिपोर्ट नहीं लिखी जाती ऐसी कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं।

सरेराह कोई भी चाकू चलाकर खून बहाता निकल जाता है। और जिले की पुलिस सड़कों पर बहता हुआ मजबूर आदमी का खून देखने पहुंचकर अपनी खानापूर्ति करने में जुट जाती है ।बलौदाबाजार पुलिस को अपराधियों के साथ जिस तरह सख्त होना चाहिए वह विलुप्त प्राय हो गई है। अपराधियों पर नकेल कसी जानी चाहिए लेकिन लगता है वर्तमान कप्तान और कुछ लचर थानेदारों के रहते यह संभव नहीं है।अपराधियों को देखकर पुलिस के कदम पीछे हो रहे हैं यह समझ से परे है यदि सूत्रों की माने तो इसके पीछे मोटी रकम का लेन देन करने की बात का ही सूत्र खुलासा करते हैं।

अधिकांश मामलों में सेटिंग करके मोटी रकम लेकर अपराधियों को छोड़ दिया जाता है इसी के कारण चोर माफिया और लुटेरों के हौसले बुलंद हो चुके हैं।हम नही कह रहे है घटनाएं बता रही कि जिले के थाने दार व साइबर सेल की टीम किस तरह काम कर रही है घटना 27 फरवरी को बलौदाबाज़ार के पत्रकार के घर चोरों ने दिनदहाड़े दोपहर 12:00 से 3:00 के मध्य घर में घुसकर 12.50 लाख की चोरी को अंजाम दिया लेकिन इस घटना के एक माह से ऊपर का समय होने के बाद भी पुलिस अभी तक खाली है… आखिर क्यों ? क्या क्राइम ब्रांच की इंटेलिजेंससी को लकवा मार गया है या वरिष्ठ कप्तान अपना बुद्धि विवेक खो चुके हैं ? जिसके कारण आज तक उनका पूरा महकमा मिलकर भी चोरी का खुलासा नहीं कर पाया। हद तो यह है कि जिन संदिग्धों के बारे में पुलिस को बताया गया था उनसे पूछताछ करना तो दूर पुलिस ने अभी तक सभी सीसीटीवी फुटेज और फुटेज में दिख रहे आपत्तिजनक लोगों की जांच तक नहीं की है। जिससे सवालिया निशान खड़े होते हैं कि पुलिस की नीयत चोरों को पकड़ने की है भी या नहीं ! जिले में प्रोफेशनल शातिर चोरों ने बड़ी चोरी की घटना को अंजाम देते हुए 12.50 लाख की चोरी कर पत्रकार को बड़ी चोट पहुंचाई। हालांकि चोरी गए ₹1 लाख नगद और तत्कालीन समय के सोने चांदी के जेवरातों की कीमत मात्र 2,58 हजार बिल के अनुसार रिपोर्ट में दर्ज की गई। इसी तरह एक अन्य वारदात में बलौदा बाजार में दिनदहाड़े दोपहर 1:30 बजे एक शिक्षक पीडी जहरीले केघर में घुसकर मिर्च पाउडर आंख में डालकर लूट की घटना को एक लुटेरा द्वारा दुर्दांत तरीके से अंजाम दिया गया था जिसमें शिक्षक की ले देकर जान तो बच गई किंतु पुलिस महकमा आज तक ना तो उस लुटेरों को पकड़ पाया ना ही इसका खुलासा कर पाया।

बलौदाबाजार जिले के अधिकांश थाना क्षेत्रों में घरों में चोरियां दुपहिया गाड़ियों की चोरी की घटनाएं आए दिन हो रही है। यदि यातायात सिटी सर्विलेंस सिस्टम विधिवत अपना काम करता तो एक जोर और लुटेरों को पकड़ने में पुलिस को 48 घंटे से ज्यादा का समय नहीं लगता कि दो यातयात वयवस्था की हालत जिले में पूरी तरह ध्वस्त है।सवाल यही है कि आखिर बलौदाबाजार पुलिस कर क्या रही है? या तो अपराधियों को सरकारी संरक्षण हैं या फिर पुलिस से मिलीभगत है? वरना डंके की चोट पर जिले में अपराधी अपराधों को अंजाम दे कर पुलिस की नजर से बच कर कैसे निकल रहे है ।यहां इस बात का भी उल्लेख करना बेहद जरूरी है कि बलौदाबाजार जिले को सबसे सुरक्षित माना जाता था लेकिन पिछले एक साल के दौरान बलौदाबाजार जिला सबसे असुरक्षित जिले के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। लगातार घट रही अपराधिक घटनाओं को लेकर जनप्रतिनिधि ही नहीं आम जनता भी बेहद चिंतित है। जिले के अधिकांश थानेदारो की कार्यप्रणाली जस की तस है। 1 वर्ष पूर्व जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा मैं जिले का प्रभार संभाला था तब उनके आते ही कानून व्यवस्था में सुधार आया था। लेकिन भाटापारा थाना क्षेत्र में रोहरा लूट के बाद जिस थानेदार के रहते लूट हुई थी उसी थानेदार को जिले की क्राइम ब्रांच का प्रभार दे दिया गया है। और वर्तमान में बलौदा बाजार जिले का क्राइम ब्रांच संगीन क्राइम मामलों को सुलझाने के बजाय अवैध शराब विक्रेताओं को पकड़ने में अपनी उर्जा और मेहनत खर्च करते नजर आ रहा है। जिससे अन्य थानेदारों का मनोबल टूट गया है।

जिले में खुलेआम अपराधी अपराध को अंजाम देकर लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे है और पुलिस जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते कहीं दिखाई नहीं दे रही है। इसके पूर्व भी जिले में क्राइम ब्रांच साइबर सेल में कई लोगों की पदस्थापना थी जो बड़े-बड़े मामलों को सुलझाने का काम करते थे चोर और लुटेरों को भी पकड़ने में सफलता हासिल करते थे किंतु ऐसा बेहतरीन कार्य करने वाले आरक्षक से लेकर थानेदार तक सभी पुलिसकर्मियों को क्राइम ब्रांच से बाहर का रास्ता दिखा कर जिले में क्राइम को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया है।