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अमेरिकी कोर्ट का फैसला: कंपनियों को मिलेगा 16 लाख करोड़ का रिफंड, ट्रंप सरकार पर दबाव

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। एक अहम फैसले में अमेरिकी अदालत ने उन कंपनियों को राहत देने का आदेश दिया है, जिन्होंने सरकार द्वारा लगाए गए विवादित आयात शुल्क का भुगतान किया था। अदालत ने कहा है कि जिन कंपनियों से यह शुल्क वसूला गया था, उन्हें अब अपना पैसा वापस पाने का अधिकार है। इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार पर अरबों डॉलर लौटाने का दबाव बढ़ गया है और इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।

न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में सुनवाई के दौरान जज रिचर्ड ईटन ने स्पष्ट किया कि विदेशी व्यापार से जुड़ी कंपनियों से वसूले गए कुछ टैरिफ नियमों के अनुरूप नहीं थे। इसलिए इन शुल्कों का भुगतान करने वाले आयातकों को रिफंड दिया जाना चाहिए। यह विवाद 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए आयात शुल्क से जुड़ा हुआ है। इससे पहले अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए डबल डिजिट आयात शुल्क को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिफंड का लाभ केवल उन कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी, बल्कि यह उन सभी आयातकों पर लागू होगा जिन्होंने इस कानून के तहत शुल्क का भुगतान किया है। इस फैसले से बड़ी संख्या में कंपनियों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।

इस निर्णय का वित्तीय असर अमेरिकी सरकार के लिए काफी बड़ा हो सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सरकार ने इन विवादित टैरिफ के माध्यम से लगभग 130 अरब डॉलर की राशि वसूली थी। यदि बाद में वसूली गई रकम को भी जोड़ दिया जाए तो कुल रिफंड करीब 175 अरब डॉलर यानी लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह मामला टेनेसी स्थित फिल्टर निर्माता कंपनी एटमस फिल्ट्रेशन से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आया।

अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भी अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार सरकार व्यापारिक नीतियों को और सख्त बनाने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू किए गए 10 प्रतिशत के सार्वभौमिक टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की तैयारी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका पुराने व्यापारिक प्रावधानों को फिर से लागू करने के विकल्प तलाश सकता है। इसके लिए सेक्शन 301 और सेक्शन 232 जैसे प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है, जो आयात शुल्क लगाने के लिए पहले भी इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। आने वाले समय में अमेरिका की व्यापारिक नीति में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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Kailash Jaiswal

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