134 करोड़ लोगों की पहचान बना आधार, दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डेटाबेस तैयार

नई दिल्ली: भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था आधार आज दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आधार के लगभग 134 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और इसके जरिए अब तक 17,000 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन किए जा चुके हैं।
मंत्री ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा संचालित इस प्रणाली की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आधार ने देश में डिजिटल सेवा वितरण को आसान बनाने में अहम योगदान दिया है। इसकी मदद से सरकारी योजनाओं और कई अन्य सेवाओं में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया तेज और सुरक्षित हुई है।
आधार प्रमाणीकरण के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें वन टाइम पासवर्ड (OTP), फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतली की पहचान और चेहरे की पहचान जैसी बायोमेट्रिक विधियां शामिल हैं। इसके अलावा चेहरे के जरिए पहचान की पुष्टि करने वाली प्रणाली को आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से सशक्त बनाया गया है, जिससे सत्यापन की सटीकता बढ़ती है।
सरकार के अनुसार, जो संस्थाएं आधार प्रमाणीकरण सेवाओं का उपयोग करना चाहती हैं, उन्हें नियमानुसार पंजीकरण कराना होता है। ऐसी संस्थाएं प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसी (AUA) या केवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसी (KUA) के रूप में पंजीकृत होकर सेवाओं का लाभ ले सकती हैं।
डेटा सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कई स्तरों पर प्रावधान किए हैं। आधार से जुड़ी जानकारी को एन्क्रिप्शन के माध्यम से सुरक्षित रखा जाता है और इसके उपयोग, संग्रहण तथा साझा करने पर कानूनी नियंत्रण लागू है। प्रमाणीकरण से जुड़े लॉग सीमित अवधि तक सुरक्षित रखे जाते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत निवारण की प्रक्रिया में उनका उपयोग किया जा सके।
इसके अलावा आधार प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बहुस्तरीय ऑडिट व्यवस्था भी लागू की गई है। इसमें स्व-अनुपालन जांच, वार्षिक सूचना सुरक्षा ऑडिट और शासन व गोपनीयता से जुड़े व्यापक मूल्यांकन शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार से संबंधित सभी डेटा भारत के भीतर ही सुरक्षित सर्वरों में संग्रहित और संसाधित किए जाते हैं।



