एक क्लिक में अफ्रीका के समंदर में पहुंच गया छत्तीसगढ़ के कवर्धा का पूरा गांव!

रायपुर : रायपुर में गिरदावरी का डिजिटल सिस्टम अब किसानों और पटवारियों दोनों के लिए सिरदर्द बन गया है। सरकार ने इस बार खेतों के भौतिक सत्यापन के लिए एक नया ऐप लागू किया है। मकसद था कि पटवारी घर बैठे कागज पर गिरदावरी न कर सकें, बल्कि खेत में खड़े होकर फोटो खींचें और GPS लोकेशन के साथ उसे ऐप पर अपलोड करें। इससे फसल नुकसान का मुआवजा भी सैटेलाइट और फील्ड डेटा से एकदम सटीक मिल सके. लेकिन जमीन पर हुआ इसका उल्टा।
क्या हुआ कवर्धा में?
कवर्धा जिले के एक गांव की गिरदावरी करते वक्त पूरा गांव एक ही खसरे में आ गया। मतलब एक ही खेत नंबर में पूरे गांव की जमीन दिखने लगी और तो और भाठागांव के एक खेत की लोकेशन जब ऐप पर डाली गई, तो वह छत्तीसगढ़ में नहीं, बल्कि अफ्रीका के समंदर के बीच में जाकर गिरी।
इससे भी बड़ी बात कि पटवारी हैरान हैं कि गलती कहां हो रही है। ऐप में सबसे बड़ी खामी यह है कि इसे कोई भी कहीं से भी चला सकता है। खेत की मेढ़ के चारों ओर से फोटो खींचना जरूरी है, लेकिन जब तक किसान खुद सामने खड़ा न हो तब तक सही मैपिंग करना ही मुश्किल हो रहा है।

पटवारी क्यों डरे हुए हैं?
पिछले साल इसी ऐप से सिर्फ सामान्य सत्यापन हुआ था, तब कोई दिक्कत नहीं आई थी। इस बार व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। अब हर खेत की चारों तरफ से फोटो लेनी है, लोकेशन कैप्चर करनी है और उसी वक्त अपलोड करना है। लेकिन सर्वर बार-बार अटक रहा है। कई जगह लोकेशन गलत पकड़ रहा है। पटवारियों का कहना है कि अगर आज गलत लोकेशन अपलोड हो गई, तो कल उसी को लेकर जमीन के बड़े विवाद खड़े होंगे। किसान कहेगा – मेरी जमीन यहां है ऐप कहेगा – समंदर में है।
इस मामले पर पटवारी संघ रायपुर के जिलाध्यक्ष कमलेश तिवारी का कहना है कि सरकार ने बिना सही ट्रेनिंग के आदेश जारी कर दिया। ऐप को पहले ठीक से टेस्ट करना चाहिए था फिर लागू करना चाहिए था।
आगे क्या होगा?
अगर यही गड़बड़ी चलती रही तो गिरदावरी का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड ही गलत हो जाएगा। इससे फसल बीमा, मुआवजा और जमीन के मालिकाना हक तीनों पर असर पड़ेगा। अब सवाल यही है कि डिजिटल करने की जल्दबाजी में क्या सरकार ने किसानों की जमीन को ही खतरे में डाल दिया है?



