
नई दिल्ली। मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 15 अक्टूबर को सुनवाई प्रस्तावित है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं की ओर से दायर याचिका में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। याचिका में 24 जून 2025 से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने सहित कई राहत मांगी गई हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर अदालत का अंतिम रुख सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक कराने की मांग की है। इसमें ईसीआईनेट और ईआरओनेट प्रणालियों से जुड़े दस्तावेज, आंतरिक टिप्पणियां, बैठक का विवरण और लॉग फाइलें शामिल हैं। उनका कहना है कि इन रिकॉर्ड की जांच से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
याचिका में एक स्वतंत्र समिति बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को देने और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और संबंधित तकनीकी प्रणालियों की स्वतंत्र जांच हो।
मतदाता सूची से नाम हटाने के नियमों पर भी उठाए सवाल
याचिका में मांग की गई है कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना दी जाए और अपना पक्ष रखने का अवसर मिले। विपक्षी नेताओं ने हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म-6 से जुड़े नियमों में बदलाव और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
तकनीकी आपत्तियों के कारण टली थी सुनवाई
इस मामले में याचिका को पहले 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सका था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दस्तावेजों से संबंधित कई कमियां बताई थीं। इनमें कुछ दस्तावेजों का अस्पष्ट होना, पन्नों का गायब होना और कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे से जुड़ी खामियां शामिल थीं। कोर्ट फीस में भी कमी बताई गई थी। इन आपत्तियों को दूर करने के बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी दी गई।
सुनवाई में क्या रहेगा अहम?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एसआईआर प्रक्रिया की वैधता, मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े सवाल अहम रह सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र तकनीकी जांच और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई निर्देश देने का अनुरोध किया है।
फिलहाल, इन मांगों पर अदालत क्या रुख अपनाती है, यह सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा। मामले में अंतिम निर्णय आने तक याचिकाकर्ताओं के आरोपों और उनकी ओर से मांगी गई राहत को अदालत का फैसला नहीं माना जा सकता



